राफेल डील गोपनीयता का हवाला यानि 'कुछ तो गड़बड़ जरूर है' -राहुल


प्रधानमन्त्री ने स्वयं फ्रांस यात्रा के दौरान राफेल डील को अंतिम रूप दिया था। इस डील को फाइनल करने से पूर्व कोई टेंडर जारी नहीं किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को नजरअंदाज कर इस डील में रक्षा क्षेत्र में पूर्णतः अनुभवहीन अनिल अंबानी की कंपनी को शामिल कर लिया गया है। इसलिये राहुल गांधी इस डील पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिये उन्हें राफेल डील में शामिल किया गया है? प्रधानमंत्री के पेरिस दौरे के समय अनिल अंबानी भी वहां मौजूद थे। इससे भी यह सन्देह पैदा होता है कि क्या पहले से ही सब कुछ तय नहीं हो गया था?


राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन से सवाल किया था कि राफेल विमानों की डील कितनी राशि में हुई है? तो रक्षा मंत्री ने गोपनीयता का हवाला देते हुए डील की राशि का ब्यौरा देने से इंकार कर दिया। यानी देश की जनता को ही इस जानकारी से वंचित किया जा रहा है कि उसके धन का किस तरह इस्तेमाल किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार की 36 राफेल विमानों की डील के विपरीत यूपीए सरकार के समय 108 विमानों की डील लगभग फाइनल हो गयी थी। यह भी बताया जा रहा है कि एनडीए सरकार की यह डील यूपीए सरकार की डील से बहुत ज्यादा यानी लगभग 58 हजार करोड़ की हुई है। क्या इसीलिये रक्षा मंत्री गोपनीयता का हवाला देकर डील की राशि का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं कर रही हैं?

इन सब सवालों का जवाब नहीं मिलने के कारण ही राहुल गांधी कह रहे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है। उन्होंने मीडिया और पत्रकारों के जमीर को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि वे जानते हैं कि आप लोग भयभीत हैं, डरे हुए हैं, आप पर बहुत ज्यादा दबाव है लेकिन कुछ तो back bone आप लोगों को भी रखना चाहिये

@ प्रवीण मल्हौत्रा 


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