...और दिल में उसकी मासूम सी हँसी


पुरानी किताबें 
पुरानी हस्तप्रत
पुराने हिसाबों की सूचि 
पुराने रिश्तों की महक

रद्दी में डालने से पहले 
सोचा एक नज़र देख लूं

मोतियों से अक्षरों में 
उभरता हुआ चेहरा 
नज़र आया और बस 
देखता रह गया मैं जैसे

बालों में फूल सजाकर 
नाचती हुई आती थी 
आँखें नचाती वो परी

अंकल, मैंने कविता लिखी 
आँखों से टपकती बूंदों में 
धुंधला हो गया उसका चेहरा

मेरे हाथ में पीला सा कागज 
मोतियों से अक्षरों में उभरी 
वो कविता और उसका चेहरा

शायद अब मेरे हाथ में 
यही तो बच पाया है और दिल में 
उसकी मासूम सी हँसी !

                                                          - पंकज त्रिवेदी   

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1 comments:

  1. आदरणीय पंकज जी-- हार्दिक बधाई जो ये प्यारी और अनुपम स्नेह भरी रचना यहाँ शोभा बढ़ा रही है | !!!!!!!!!!!!

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