क्यों बढ़ रही है समाज में आत्महत्या की प्रवृत्ति और कैसे रोका जा सकता है इसे





संकट की घड़ी में धैर्य रखने से रुक सकती है आत्महत्या की प्रवृत्ति 
- कलेक्टर श्री नरेश पाल

''संकट और विपरीत परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति का मनोबल गिर जाता है, बेरोजगारी, बीमारी एवं अन्य कारणों से व्यक्ति किंम कर्त्तव्य विमूढ़ हो जाता है तथा यह स्थिति व्यक्ति को आत्महत्या के लिये प्रेरित करती है।'' 

यह बात कलेक्टर शहडोल श्री नरेश पाल ने मीडिया संवाद कार्यक्रम में कही ।कार्यक्रम जन सम्पर्क कार्यालय द्वारा कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में अगर व्यक्ति धैर्य से काम ले तो ऐसे व्यक्ति का जीवन बच सकता है। कलेक्टर ने कहा कि हमारे धर्मशास्त्रों ने कहा है कि मनुष्य का जन्म 84 हजार योनियों में जन्म लेने के बाद होता है। इसके बावजूद समाज में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होने कहा कि इस प्रवृत्ति को हमें रोकना होगा, आत्महत्या की प्रवृत्ति के प्रति लोगों में जागरूकता लाना होगा। इस दिशा में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

कलेक्टर ने कहा कि युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिये राज्य शासन द्वारा हेल्प लाइन बनाई गई है, जिला चिकित्सालयों में रोशनी क्लीनिक आदि भी संचालित हैं। उन्होने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिये समाज और बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आना होगा तथा लोगों को जागरूक करना होगा। मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्णमोहन झा ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने में मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होने कहा कि इसके लिये लोगों में जनजागरूकता लाने की आवश्यकता है जो मीडिया बखूबी कर सकता है। 

उन्होने कहा कि व्यक्ति आत्महत्या करने के लिये क्यो विवश होता है हमे इस पर विचार करना चाहिए तथा आत्महत्या की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने वाले कारकों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होने कहा कि युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिये एक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, जिसमें मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 



आत्महत्या की खबरों का बहुत ज्यादा महिमा मंडन नहीं करे मीडिया 
-पत्रकार श्री कमल किशोर चतुर्वेदी

मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार श्री कमल किशोर चतुर्वेदी ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिये मीडिया को आत्महत्या से संबंधित खबरो को महिमा मंडित कर प्रकाशित करने पर रोक लगाना होगा तथा आत्महत्या की खबरों का बहुत ज्यादा महिमा मंडन नहीं करना होगा। 

उन्होने कहा कि कई बार आत्महत्या की खबरों को मीडिया काफी महिमा मंडित करता है इस प्रवृत्ति से बचना होगा। मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ श्री संदीप तिवारी ने कहा कि आत्महत्या से संबंधित खबरो को मीडिया को जिम्मेदारी के साथ उठाना चाहिए। उन्होने कहा कि विद्यार्थियों में आज सर्वाधिक आत्महत्या की प्रवृत्ति पाई जा रही है, इसके लिये शिक्षा विभाग ने हेल्पलाइन प्रारंभ की है यह एक अच्छी पहल है। उन्होने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया एवं फेसबुक, यूट्यूब जैसे आधुनिक मीडिया ग्रुपों से हीं नहीं जुड़ना चाहिए बल्कि अपने परिवार के सदस्यों से भी जुड़ाव रखना चाहिए इससे युवाओं का संबल बढ़ेगा। 

मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये वरिष्ठ पत्रकार श्री सईद खान ने कहा कि युवाओं जीवन में कभी कोई रास्ता बंद नहीं होता, प्रयास करने से हर मंजिल मिलती है कि उक्ति को अंगीकार करते हुये निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होने कहा कि समस्याएं हल हो सकती हैं बशर्तें उसके लिये हम निरंतर प्रयास करते रहें। उन्होने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बहुत जल्द ही हतास एवं अवसाद ग्रस्त हो जाती है, युवाओं को इस विषम परिस्थिति से बचना चाहिए तथा पारिवारिक सदस्यों से संवाद करना चाहिए अपनी समस्याएं अपने बुजुर्गों को बताना चाहिए। 

उन्होने कहा कि आत्महत्या करना किसी समस्या का हल नहीं हैं, समस्याएं तो तब हल होंगी जब हम समस्याओं को हल करने के लिये निरंतर प्रयास करेंगें। मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये वरिष्ठ पत्रकार श्री संजीव निगम ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने में मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होने कहा कि मीडिया को आत्महत्या के प्रति जागरूकता अभियान चलाना चाहिए तथा लोगों को आत्महत्या की प्रवृत्ति से बचाने के लिये मीडिया को पहल करनी चाहिए। मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये वरिष्ठ पत्रकार श्री अरविंद पाण्डेय ने कहा कि शहडोल संभाग में मीडिया में ऐसी प्रवृत्ति का विकास नहीं हुआ है जो आत्महत्या संबंधी खबरों को बढ़ाचढ़ाकर लिखें। उन्होने कहा कि शहडोल संभाग मे मीडिया ने सदैव सकारात्मक खबरों को लोगों के समक्ष रखा है। 

कार्यक्रम के संबोधित करते हुये दैनिक भारती समाचार पत्र के उप संपादक श्री अजय जायसवाल ने कहा कि स्टूडेंण्ड की आत्महत्या रोकने के लिये काउंसलिंग होती है वैसी काउंसलिंग किसानों की आत्महत्या को रोकने के लिये भी होनी चाहिए। उन्होने कहा कि उभोक्तावादी संस्कृति से सभी को लड़ना होगा,  उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारी अपेक्षाओं को बढ़ाया है, जिसके कारण युवाओं मे आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है।  

इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एस.कृष्ण चैतन्य एवं शहडोल संभाग के वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे। मीडिया संवाद कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री दिनेश अग्रवाल ने किया। मीडिया संवाद कार्यक्रम में उपसंचालक जन सम्पर्क श्री जी.एस.मर्सकोले द्वारा मीडिया कार्यशाला आयोजन में सहयोग देने पर सभी का आभार व्यक्त किया गया। 

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