तुम्हें दु:खी होने का अधिकार नहीं है



कभी किसी भालू को नाचते देखा है
मदारी के बन्दर को बन्दरिया के पीछे 
टोपी पहने कर आशिकी दिखाते
जब बन्दरिया जाती है रूठकर मायके
कभी की है हाथी या ऊंट की सवारी
किसी घोड़े की लगाम को 
थामकर सरपट दौड़ाया है
जिसकी आंखों पर बंधी पट्टी 
सीमित कर देती है उसके दृश्य को
मनाली की पहाड़ियों पर 
मात्र 50 रुपये में हो जाती है याक की सवारी
देखी है सर्कस
देखा है शेर को आग के गोले के बीच में से कूद कर निकलते
हाथी को छोटी सी कुर्सी पर बैठकर साधते सन्तुलन 
बजाई है ताली
और तुम हुए हो खुश 
हंसे हो ठठाकर 
तो 
जब सुनो कोई समाचार किसी जानवर के 
मनुष्य पर हमला करने का
तुम्हें दुखी होने का अधिकार नहीं है.

@ लीना मल्हौत्रा, न्यू देहली 


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