जनसुनवाई में बढ़ती भीड़, निचले स्तर पर समाधान क्यों नहीं किया जा रहा, देखने की ज्यादा जरूरत





“साब! जिला अस्पताल गुना में लगे स्वास्थ्य शिविर में भोपाल से आए चिकित्सा विशेषज्ञ ने मेरी बीमारी के इलाज का एस्टीमेट बनाकर दे दिया है, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर अपनी रिपोर्ट बनाकर नहीं दे रहे हैं. मुझे डॉक्टर से रिपोर्ट दिलवा दें, ताकि मैं अपना इलाज शुरू करवा सकूं.” 

यह गुहार जनसुनवाई में गुना निवासी विवेक पाठक ने गुना कलेक्टर राजेश जैन से लगाई. हालांकि इसके तत्काल बाद कलेक्टर ने डॉक्टर से आवेदक को रिपोर्ट दिलवाने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी गुना को निर्देश दिए, लेकिन सवाल यह उठता है कि व्यवस्था कितनी ख़राब बन गई है और चिकित्सा जो कभी सेवा का कार्य था, अब कितना दुर्गम और अमानवीय बन गया है. जिस काम में कुछ नहीं लगना वहां भी लटकाया जा रहा है. 

जनसुनवाई में ग्राम चुरैला के लक्ष्मण सिंह सहरिया की शिकायत थी कि उसने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत उद्योग विभाग से दो लाख रूपये का ऋण प्रकरण मंजूर कराया था, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक के बार बार चक्कर लगाने के बावजूद वहां के शाखा प्रबंधक द्वारा सिर्फ पैसे लेकर ही ऋण देने की बात की जा रही है, जबकि मैं गरीब आदमी हूँ. लक्ष्मण की फरियाद पर कलेक्टर ने प्रकरण की जांच करने महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र को निर्देश दिए.

माधोपुर के बाशिंदे भीकम सिंह की पत्नी के दिमाग की नस फट गई है, बी.पी.एल कार्ड नहीं होने से  वह उसका इलाज नहीं करा पा रहा, तो गोडबाबा की गली में रहने वाली रश्मि अहिरवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. वह भी अपना नाम बी.पी.एल. सूची में जुड़वाना चाहती है. 

    ग्राम सानई के केदारसिंह लोधा गांव के दबंगों द्वारा आम रास्ते पर बेजा कब्जा कर रास्ता बंद कर देने से परेशान है. ग्राम ढुरढुरू के चन्द्रमोहन सिंह यादव भावांतर भुगतान योजना के तहत मंडी में उड़द बेची थी, लेकिन उसको अब तक भावांतर भुगतान योजना की राशि का भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है. चन्द्रमोहन ने भावांतर योजना का लाभ दिलवाने की कलेक्टर से गुहार लगाई। कलेक्टर ने इस प्रकरण में तत्परता से उचित कार्रवाई करने की उपसंचालक कृषि को हिदायत दी। 

सामान्यतः जनसुनवाई में वह मामले आ रहे हैं, जिन्हें आसानी से निचले स्तर पर ही निपटाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. हर मंगलवार को बहुत मामूली बातें लेकर लोग कलेक्टर तक पहुँच रहे हैं. कलेक्टर के निर्देश के बाद भी ऐसे कई मामले मिल जायेंगे, जिनमें तब भी कोई उचित कार्यवाही नहीं की गई. असल में निर्देश से अधिक, और पहले निचले स्तर पर समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा, यह देखने की ज्यादा जरूरत है.  


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