'जब तक काला और तब तक ताला' में पत्रिका की बड़ी जीत, सरकार ने वापस लिया काला कानून

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'जब तक काला और तब तक ताला' में राजस्थान के प्रमुख अख़बारों में से एक राजस्थान पत्रिका को आज बड़ी जीत मिल गई है, सरकार ने काला क़ानून बताये जा रहे विधेयक को वापस ले लिया है.

माह अक्टूबर में राजस्थान सरकार ने दो विधेयक पेश किए थे, जिनको लेकर काफी विवाद और विरोध के बाद इसे विधानसभा की प्रवर समिति के पास भेज दिया गया, लेकिन वापस नहीं लिया गया था, अब भारी विरोध के बाद चार माह बाद आज सरकार ने विधेयक वापस ले लिया है.
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने पिछले महीने दो विधेयक- राज दंड विधियां संशोधन विधेयक, 2017 और सीआरपीसी की दंड प्रक्रिया सहिंता, 2017 पेश किया था. इस विधेयक में राज्य के सेवानिवृत्त एवं सेवारत न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों और लोकसेवकों के खिलाफ ड्यूटी के दौरान किसी कार्रवाई को लेकर सरकार की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें जांच से संरक्षण देने की बात की गई है. यह विधेयक बिना अनुमति के ऐसे मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग पर भी रोक लगाता है. विधेयक के अनुसार, मीडिया अगर सरकार द्वारा जांच के आदेश देने से पहले इनमें से किसी के नामों को प्रकाशित करता है, तो उसके लिए 2 साल की सजा का प्रावधान है.
राजस्थान के प्रमुख अख़बारों में से एक राजस्थान पत्रिका ने इसे काला कानून बताया और कहा कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं किया जाता, तब तक राजस्थान पत्रिका मुख्यमंत्री वसुंधरा और उनसे संबंधित कोई खबर नहीं छापेगा. और इस बात को डेली मुख्यपृष्ठ पर प्रकाशित किया जा रहा था. 
शैलेन्द्र तिवारी 

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