बीमारी का पता नहीं, इलाज का पुख्ता इंतजाम




किसी भी देश के लिए सबसे प्रमुख होता है वहां के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा उपलब्ध हो, लेकिन यहाँ तो हालात ही अलग हैं. बीमारी का पता नहीं, पर इलाज का पुख्ता इंतजाम किया जा रहा है. यह काम कोई और नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय कर रहा है. जरा गौर फरमाइए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की बातों पर. सब कुछ साफ हो जाएगा.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे

बीमारी ही ठीक से पता नहीं, इलाज कैसे करेंगे?
मंत्री जी ने कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह नहीं पता कि देश में कितने सरकारी और निजी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा है. राज्य सरकारों के पोर्टल से एकत्रित जानकारी के मुताबिक 533 सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा है. रही बात Nephrologists की तो केंद्र सरकार को इतना तो पता है कि मांग के लिहाज से देश में Nephrologists काफी कम हैं, पर कितनी कमी है, इसका आंकड़ा नहीं है, पर इस कमी दूर करने के लिए कई उपाय अवश्य किए जा रहे हैं.

अब इसे क्या कहें, जब बीमारी ही ठीक से पता नहीं है तो इलाज कैसे संभव है?

किशोर कुमार 




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