BJP सरकार का आखिरी बजट, नहीं आ सके 'अच्छे दिन'





सरकार का वश चले तो जीने का हक़ ही छीन ले

BJP सरकार का आखिरी बजट आ गया है. इस देखकर कहा जा सकता है कि जैसी उम्मीद की जा रही थी कि कम से कम 2019 में फिर से जनता के बीच जाना है, सो बजट आम लोगों के लिए कुछ ख़ास लेकर आयेगा, लेकिन वैसा नहीं हो सका. आम लोगों के 'अच्छे दिन' का सपना अभी पूरा नहीं हो सका है. बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है. डीजल और पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है. मध्यम वर्ग की बात करें तो कहा जा रहा है 'सरकार का वश चले तो वह उससे जीने का हक़ ही छीन ले.' 

बड़ों का बढ़ाया वेतन, गरीबी मिटाने की दिशा में कोई कदम नहीं
बजट 2018 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की सैलरी बढ़ाई जाएगी. बढ़ने के बाद राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख रुपए महीने हो जाएगी. वहीं उपराष्ट्रपति की सैलरी 4 लाख रुपए महीने और राज्यपाल की सैलरी 3.5 लाख रुपए महीने हो जाएगी. सांसदों के भत्ते भी हर पांच साल में बढ़ेंगे, लेकिन बजट में गरीबी मिटाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है. 

कोशिश जारी है, जारी रहेगी 2024 तक 
वित्त मंत्री ने क्रिप्टो करेंसी गैरकानूनी बताते हुए कहा है कि बिटकॉइन जैसी करेंसी नहीं चलेगी, लेकिन यह चल रही है और कौन, कब रोकेगा, इस पर कोई बात नहीं की जा रही है. लोग छले जा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि जीएसटी को आसान बनाने की कोशिश जारी है. इस पर लोग कह रहे हैं कि यह कोशिश 2024 तक जारी रहेगी. 

घोषणाएं वह भी छलावा 
10 करोड़ गरीब परिवारों को मेडिकल खर्च मिलेगा. हर परिवार को एक साल में 5 लाख का मेडिकल खर्च मिलेगा. देश की 40 फीसदी आबादी को सरकारी हेल्थ बीमा मिलेगा. बजट 2018 की स्पीच में वित्त मंत्री ने कहा कि अगले 3 साल में सरकार सभी क्षेत्रों में 70 लाख नई नौकरियां पैदा करेगी. वित्त मंत्री ने किसानों के लिए कुछ घोषणाएं की हैं, लेकिन वह अगले 3 साल बाद तक पूरी होंगी, यानि कि पहले 2019 में जिताओ. प्रतिक्रिया में सरकार के लोग भी कह रहे हैं योजनाओं के धरातल पर आने में समय लगता है. सीधी बात है कि यह मात्र छलावा है.   

बजट से बाबा रामदेव भी हुए निराश 
बजट पर योगगुरु बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया में राष्ट्र निर्माण वाला बजट बताया है, लेकिन उन्होंने कहा है कि आयकर में पांच लाख रुपए की सीमा तक राहत मिलना चाहिए थी. और उन्हें ऐसा यकीन था, लेकिन वह निराश हुए..

पकौड़ा बजट 
इस बार लोग चाहते थे कि इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़े, होम लोन पर टैक्स छूट मिले. वहीं पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी कम की जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. जेटली के बजट की सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ रही है. लोग इस इसे पकौड़ा बजट बता रहे हैं. 

और अंत में 
बजट के बाद एक मध्यम वर्गीय की व्यथा को इस तरह बयाँ किया रतलाम से संजय जोशी "सजग'' ने 
''अमीर अपने में मस्त है, गरीब अपने में व्यस्त है,
जो बीच का है वही पस्त है, और सहने का अभ्यस्त है''

बलभद्र मिश्रा 



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