मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है श्रीमद् भागवत कथा : पंडित योगेंद्र शास्त्री


''भक्तों की भक्ति की पराकाष्ठा और जीवन जीने की कला क्या हो पर, सुभाष कॉलोनी स्थित माँ भवानी शिव हनुमान मंदिर प्रांगड़ में श्री चल रही श्रीमद् भागवत की कथा में परम श्रद्धेय श्री योगेंद्र शास्त्री जी द्वारा विस्तार से बताया गया''

भोपाल सुभाष कालोनी स्थित माँ भवानी शिव हनुमान मंदिर प्रांगण में सप्तदिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन बुधवार से प्रारंभ हुआ है। प्रथम दिवस के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई जो विभिन्न मार्गों से होकर कथा स्थल पहुंची। मार्ग में कई जगह पुष्प वर्षा कर कलशयात्रा का स्वागत किया गया। यात्रा में मुख्य यजमान श्री बैजनाथ ठाकुर सिर पर श्रीमद्भागवत रखकर चल रहे थे तो श्रद्धालुओं ने भी अपने हाथों में धर्म ध्वजा पताका थाम रखी थी। कथा के प्रथम दिवस पर परम श्रद्धेय श्री योगेंद्र शास्त्री ने भागवत कथा महात्म्य, मनुष्य तन का महत्व एवं पित्र भक्त गोकर्ण धुंधकारी के चरित्र का मार्मिक वर्णन सुनाया। आयोजन समिति के अनुसार कथा 13 फरवरी तक रोजाना अपरान्ह 3 बजे से 6 बजे तक चलेगी। जिसमें धर्म श्रद्धालु भक्तगण सादर आमंत्रित हैं।


माँ भवानी शिव हनुमान मंदिर प्रांगड़ में श्री चल रही श्रीमद् भागवत की कथा के दुसरे दिन परम श्रद्धेय श्री योगेंद्र शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद् भागवत का मंगलाचरण करते हुए मंगलाचरण के संदर्भ में भगवान के 24 अवतारों का वर्णन  सुनाया। उन्होंने भगवान कपिल के जन्म महोत्सव की कथा पर प्रकाश डालते हुए भक्त ध्रुव का चरित्र एवं नारी चरित्र के माध्यम से मानव जीवन के लिए मूल्यवान उपयोगी वस्तु क्या है एवं मनुष्य को क्या करना चाहिए, विषयों पर प्रकाश डाला। 

श्री शास्त्री ने बताया कि किस प्रकार जीवन के अंतिम साधन श्रीमद् भागवत के श्रवण करने से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है । इसके बारे में उन्होंने श्रोताओं को गूढ़ रहस्यों की जानकारी दी। कथा प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक होती है समिति के अनुसार रोज नए नए उत्सवों की सूचना प्रदान की जाती है।

साप्ताहिक श्रीमद् भागवत की कथा में कल आचार्य पंडित योगेंद्र शास्त्री जी के द्वारा बड़े ही दिव्य भव्य रुप से भक्त प्रहलाद के चरित्र का बखान करते हुए मानव जीवन में भक्तों की भक्ति की क्या पराकाष्ठा है, यह बिंदु पर प्रकाश डालते हुए एवं सृष्टि का विस्तार किस प्रकार से हुआ भगवान नारायण द्वारा ब्रह्मा जी का प्रकट करना एवं ब्रह्मा जी द्वारा मनु शतरूपा मनु शतरूपा के माध्यम से सृष्टि का विस्तार मन्वंतरों का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत के माध्यम से जीवन जीने की कला को विस्तार से समझाया 

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