अब तो कारखाने खोले सरकार या फिर उज्जैन में बनाएं बेरोजगार अपना मंदिर






बहुत हो गया मंदिर-मस्जिद

आज मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर रोजगार के बड़े व्यापार केंद्र बन गए हैं. जो मंदिर आजादी के पहले बने हुए हैं, वही मंदिर देश में रहना चाहिए. आज किसी और मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर को बनाने के बजाय रोजगार के लिए फैक्ट्री कारखाने जैसे उद्योग लगाए जाना चाहिए, जिससे लोगों को रोजगार मिले.

मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने लोग रंग बिरंगे टीके लगाकर भगवान का नाम लेकर भोली भाली जनता को लूटते हैं, जबकि घर में मंदिर बना कर या माता-पिता को सामने देखकर नमन करना सबसे बड़ी पूजा है. आप देखते रहते हैं कि कोई भी कभी भी किसी मंदिर का फोटो, किसी मूर्ति का फोटो, उनके नहाने धोने का फोटो, उनके सवारी यात्रा निकालने का फोटो, उनके मंदिर में श्रृंगार दर्शन के फोटो शेयर करते रहते हैं. करते रहो दिन भर देखते रहो, हो सकता है आपके यहां लक्ष्मी की बरसात होने लगे, पर मुझे तो ऐसा नहीं लगता. बहुत हो गया मंदिर-मस्जिद, अब रोजगार के लिए कारखाने खोलो. 

और सरकार यह नहीं करे तो मैं बेरोजगार युवक युवतियों से अपील करता हूं कि जीते जी रोजगार नहीं मिल रहा, इसलिए उज्जैन से शुरुआत करें, बेरोजगार मंदिर की. जहां लोग पत्थर की मूरत पर हजारों लाखों रुपए प्रति दिन चढ़ा रहे हैं, अगर बेरोजगारों को यह रकम मिलने लग जाए तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है.

@ सत्यप्रकाश भारतीय, उज्जैन 



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