समाज एक बार फिर शर्मशार, महिला अतिथि विद्वान ने किया केशों का बलिदान



शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के पदों पर अतिथि विद्वान के रूप में 20-25 सालों तक कार्य करने के बाद मप्र शासन उन्हें स्थाई/संविदा करने की बात तो दूर उन्हें हटाने पर उतारू हैं. 4500 अतिथि विद्वान शासन से अपने वर्षों की मेहनत के बदले अपने नियमितीकरण/संविदा की मांग कर रहे हैं. जिसके लिए आज एक महिला अतिथि विद्वान (अस्थाई सहायक प्राध्यापक) ने अपना सिर मुंडवाकर शासन की शोषणकारी नीतियों का विरोध किया.

अतिथि विद्वानों का कहना है कि किसी भी महिला के सिर के बाल उसकी एक बड़ी इज्जत होती हैं, किंतु आज सरकार और उसके नुमाइंदों को कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा.

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News Digital India 18

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