वो अगर दिन को रात कहें, रात कहो, अन्यथा सितम होता है और दूर दूर तक न्याय नहीं मिलता

अन्याय की पराकाष्ठा  


प्रताड़ना के बाद हवलदार ने खा लिया सल्फॉस
अब परिवार न्याय के लिए 7 दिन से बैठा है भूख हड़ताल पर

भिंड. नौकरी में चुपचाप ऊपर वालों की हर बात सुनते रहो. वो दिन को रात कहें रात कहो, अन्यथा आपके साथ सितम होता है और दूर दूर तक न्याय नहीं मिलता. यही बात साबित हो रही है रौन के हवलदार रामकुमार शुक्ला के परिवार के साथ. हवलदार रामकुमार शुक्ला ने तो तंग आकर सल्फास खा लिया, अब परिवार न्याय के लिए 7 दिन से भूख हड़ताल पर है. न्याय की गुहार कोई नहीं सुन रहा, दोषियों के खिलाफ FIR तक नहीं हो रही है. खानापूर्ति के लिए सस्पेंड किये गए टीआई गौर साहेब बहाल हो गए हैं. 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं कि अगर कोई पुलिस वाला प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करता है तो उस पर कार्रवाई की जाए. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि प्राथमिकी दर्ज होने के एक हफ्ते के बाद जांच पूरी हो जानी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो संबंधित पुलिस वाले को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन  टीआई और एसपी की प्रताड़ना के बाद थाने में ही सल्फॉस खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेने के लिए मजबूर होने वाले  हवलदार रामकुमार शुक्ला के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है. मजबूर होकर अब पूरा परिवार भूख हड़ताल पर है.

आज भूख हड़ताल का सातवां दिन भी समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है. पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन केवल दोषियों को बचाने में लगा है. प्रशासन की लापरवाही से हमारे परिवार के एक सदस्य की जान जा चुकी है, वह अब और क्या चाहता है कि बाकी का बचा हुआ परिवार भी अपनी जान गवां दे.

परिवार केवल दोषियों पर तुरंत FIR कर कार्यवाही के लिए न्याय चाहता है. पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ FIR पर ही अनशन ख़त्म करेंगे. अन्यथा माननीय राष्ट्रपति जी हमें कृपा कर इच्छामृत्यु के लिए स्वीकृति प्रदान करें. 

स्वर्गीय हवलदार रामकुमार शुक्ला के बेटे विकास शुक्ला का कहना है कि उनके पिता हवलदार रामकुमार शुक्ला ने टीआई और एसपी की प्रताड़ना के बाद थाने में ही सल्फॉस खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी. मुझे वरिष्ठ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि 4 दिन में जांच पूरी कर ली जाएगी, लेकिन 4 माह बीतने के बाद भी जांच नहीं हो पाई है. जांच कर रहे एएसपी अनुराग सुजानिया की ओर से मुझे करीब 6-7 बार पत्र भेजे गए, लेकिन हम लोग जब बयान के लिए जाते हैं तो कह दिया जाता है साहब अभी दूसरी जगह ड्यूटी पर गए हैं. इतना ही नहीं हमें धमकाया जा रहा है. पिछले शुक्रवार से हवलदार शुक्ला की पत्नी लीला देवी, बेटे विकास और आकाश ने अनशन शुरू किया है.

2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर रौन थाने में पदस्थ हवलदार रामकुमार शुक्ला ने थाना परिसर में साफ-सफाई को लेकर तत्कालीन टीआई सुरेंद्र सिंह गौर और एसपी अनिल सिंह कुशवाह पर आरोप लगाते हुए सल्फॉस निगल लिया था. 2 अक्टूबर को ही इलाज के दौरान हवलदार की ग्वालियर में मौत हो गई थी. इसके बाद टीआई गौर को सस्पेंड किया गया था और एसपी रहे अनिल सिंह कुशवाह को भिंड से हटाकर इंदौर 5वीं बटालियन में पदस्थ किया गया था. तत्कालीन डीआईजी अनिल शर्मा ने जांच का जिम्मा मुरैना एसपी अनुराग सुजानिया को दिया था. हवलदार के परिजन शुरू से ही इस जांच का विरोध करते रहे हैं.

हवलदार के परिजनों का कहना था कि एएसपी रैंक का अफसर अपने से सीनियर अधिकारी की जांच कैसे करेगा. वहीं मुरैना एएसपी सुजानिया पूर्व में हवलदार के परिजन की ओर से सहयोग नहीं मिलने की बात कहते रहे हैं. ऐसे में हवलदार आत्महत्या कांड के 4 माह बीतने के बाद भी जांच अटकी है, जबकि सस्पेंड टीआई गौर बहाल हो गए थे और उन्हें चंबल जोन के तत्कालीन आईजी उमेश जोगा ने दतिया जिले में पदस्थ किया है. वर्तमान में वे दतिया जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

हवलदार शुक्ला के बेटे विकास शुक्ला ने कहा कि उनके पिता के बाद अशोकनगर जिले में एअसआई ने आत्महत्या की है. एएसआई के मामले में जांच सीबीआई कर रही है. साथ ही जिम्मेदार लोग सस्पेंड हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. विकास का कहना है कि उनके परिवार के साथ पुलिस महकमा ऐसा अन्याय क्यों कर रहा है.

विकास ने कहा कि पूर्व में उन्हें जांच कर रहे मुरैना एएसपी की ओर से बयानों के लिए रौन थाने में बुलाया गया था. बयान के लिए रौन थाने पहुंचे तो एएसपी नहीं आए, फोेन पर उनके रीडर ने कहा कि साहब आज नहीं आ रहे हैं. बयान बाद में होंगे. बाद में एएसपी मुझे लेटर देते हैं, जिसमें लिखते हैं कि मैं बयान के लिए नहीं गया, जांच में हम लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं. विकास ने कहा हम तो शुरू से ही कह रहे हैं कि एएसपी जांच नहीं कर पाएंगे.

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी ओर से आरटीआई में जांच के संबंध में जानकारी चाही गई थी, जिसमें बताया गया है कि अभी इस संबंध में दोषी पुलिस अफसरों को आरोप पत्र भी नहीं दिया गया है. यही वजह है कि दोषी अफसरों को मनचाही पोस्टिंग दी गई है. महकमे ने उन्हें आरोपी माना ही नहीं है, जबकि पिता के ऑडियो, वीडियो, सुसाइड नोट, मृत्यु पूर्व कथन हैं. विकास ने कहा कि वे मां लीला देवी, भाई आकाश के साथ न्याय मिलने तक अपने घर में ही अनशन करेंगे.

इधर  आईजी, चंबल जोन  संतोष कुमार सिंह बता रहे हैं कि जांच अधिकारी से बात की गई है. उनसे कहा गया है कि जांच तत्परता से पूरी कर निष्कर्ष पर पहुंचें.

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