बाहर किये जायेंगे 11 हजार से अधिक SC/ST कर्मचारी



महाराष्ट्र में 11,700 SC/ST के कर्मचारी बाहर किये जायेंगे. असल में यह वे लोग हैं, जो  फर्जी अनुसूचित जाति और जनजाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पा लिए थे. इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि वह लोगों को नौकरी से निकाल दे. आदेश मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की सरकार के गले की फांस बन गया है, क्योंकि ये जो 11,700 लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की है, इनमें कुछ लोग ऐसे हैं, जो पिछले दो दशकों से काम कर रहे हैं. 

महाराष्ट्र में सामने आई यह जालसाजी अधिकारियों के लिए आंखे खोलने वाली है. इतनी बड़ी संख्या होने की वजह से इस धोखाधड़ी ने सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए दुविधा खड़ी कर दी है. सरकार खुद को कर्मचारियों के गुस्से से बचना चाहती है. साथ ही जल्दी ही ये भर्ती करना आसान नहीं होगा. कामकाज पर भी असर पडेगा. अगर उसने इतने सारे लोगों को एक साथ निकाला तो यह एक बार में इतने सारे सरकारी कर्मचारियों को निकालने का सबसे बड़ा मामला होगा.

फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले ज्यादातर कर्मचारियों ने खुद को अनुसूचित जनजाति का बताया है. क्लर्क से नौकरी की शुरुआत करने वाले बहुत से लोग अब सरकार में डिप्टी सचिव के पद तक पहुंच चुके हैं. यदि यह लोग अपनी सुरक्षित नौकरियों से हाथ धोते हैं, तो राजनीतिक दलों और यूनियन के खिलाफ रैली निकालेंगे. जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जो कोई भी फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी पाने के दोषी पाए जाएंगे, उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा.
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News Digital India 18

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