मानसिक अपंग देश, बोध ज्ञान चाहिए



चेतना कहाँ से आये 
जातियों के, देश में 
बुरी तरह से बंट चुके 
विभाजितों के देश में 

प्यार की जगह, जमीं पे 
नफरतों को पालते !
भूखे पेट वोटरों को 
आत्मज्ञान चाहिए !

सड़ी गली परम्परा में,
अग्निदान चाहिए !
अकर्मण्य बस्तियां 
शराब के प्रभाव में !

खनखनातीं थैलियां 
चुनाव के प्रवाह में ! 
बस्तियों के जोश में,
उमंग नयी आ गयी !

शिथिल प्रसुप्त देश को 
नयी अज़ान चाहिए !
मानसिक अपंग देश, 
बोध ज्ञान चाहिए !

@ सतीशचन्द्र सक्सेना 

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