सलाहकार कर रहे थे गुमराह, समझ आते ही शिवराज ने लिया अध्यापकों के पक्ष में निर्णय








भोपाल. अब शिक्षकों को समान काम, समान वेतन, एक सा नाम के साथ शिक्षा विभाग में संविलियन की लम्बे समय से की जा रही मांग आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरी कर दी है. अब अध्यापकों के लिये स्थानांतरण नीति, गुरुजियों का वरिष्ठता क्रम तथा शिक्षिकाओं के लिये मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलने के सारे रास्ते खुल गए हैं.

ख़ासकर शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग अध्यापक शिक्षक लम्बे समय से करते आ रहे थे. शिवराज सरकार केवल आश्वासन मात्र देकर हर बार उन्हें बिठा देती थी, लेकिन इस बार अध्यापकों ने आर पार की लड़ाई का न केवल मन बना लिया था, बल्कि यह मुंडन और वह भी महिलाओं के द्वारा कराया जाकर दिखा भी दिया था. भोपाल में मुंडन के बाद प्रदेश भर में लगातार इस तरह के कार्यक्रम चल रहे थे. अध्यापिकाओं ने नारी के सर्वश्रेष्ठ सौंदर्य के प्रतीक केशों को त्यागकर मुण्डन तक करा लिया, इस बात की गंभीरता समझने की जगह  सरकार को उसके सलाहकार अधिकारी गुमराह कर रहे थे. 

अध्यापिकाओं ने नारी के सर्वश्रेष्ठ सौंदर्य के प्रतीक केशों को त्यागकर मुण्डन तक करा लिया, तब भी गंभीरता नहीं समझ रहा था प्रशासन 

बताया जा रहा है कि वह सरकार को बता रहे थे कि सब निपटा लिया जाएगा, और मुंडन कराने वाले अध्यापकों पर दंडात्मक कार्यवाही करेंगे जैसी बातें कर रहे थे और इस तरह के आदेश भी जारी कर दिए गए. इससे मामला और बिगड़ रहा था. आजाद अध्यापक संघ की प्रदेश अध्यक्ष शिल्पी सिवान का कहना था कि इस तरह के आदेश सरकार की दमनकारी नीति दर्शाते हैं. हम नहीं डरेंगे और इस आदेश की होली जलाएंगे. जब इस प्रकार आदेश की होली जलाने का एलान कर दिया गया, तब सरकार को समझ आया कि गलती हो रही है, और मुख्यमंत्री शिवराज ने निर्णय ले लिया.

आज भी शाहजहाँनी पार्क में प्रदर्शन किया, दी तालाबंदी की चेतावनी 
आज भी शाहजहाँनी पार्क में प्रदर्शन कर रहे अध्यापकों ने मांगें नहीं मानी तो स्कूलों में तालाबंदी की जायेगी की चेतावनी दी थी. तब दोपहर बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्यापकों को मुख्यमंत्री निवास बुलाया और उनकी समस्याओं के निराकरण की घोषणा कर दी. अध्यापक संघों के पदाधिकारियों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा अध्यापकों के अलग-अलग संवर्गों का शिक्षा विभाग में संविलियन होगा. अब सिर्फ एक संवर्ग शिक्षक संवर्ग होगा. अध्यापक संवर्ग सहित संविलियित सभी संवर्गों को, शिक्षकों को जो सुविधाएँ मिलती हैं, वह मिलेंगी. उन्होंने कहा कि आज के फैसले का लाभ अध्यापक और अन्य संवर्गों के लगभग तीन लाख लोगों को मिलेगा.

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज के दिन से अध्यापकों के साथ ऐतिहासिक अन्याय दूर हो रहा है. अध्यापकों को मिल रही सुविधाओं में स्थानांतरण नीति, गुरुजियों का वरिष्ठता क्रम तथा शिक्षिकाओं के लिये मातृत्व अवकाश की सुविधा शामिल रहेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रदेश ने वह दौर भी देखा है जिसमें शिक्षकों को कर्मी बना दिया गया था. वर्तमान सरकार ने प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में कर्मी कल्चर समाप्त कर नयी शैक्षणिक संस्कृति स्थापित करने के लिये वर्ष 2004 से आज तक अनेक महत्वपूर्ण फैसले लेकर उन्हें लागू किया है. उन्होंने कहा अब अध्यापकों सहित शिक्षक संवर्ग में शामिल सभी संवर्गों का दायित्व है कि वे निश्चिन्त होकर अपना ध्यान बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर लगायें. पूरी मेहनत और निष्ठा से बच्चों को पढ़ायें और उनका भविष्य बनायें. शिक्षकों का भविष्य राज्य सरकार बनायेगी.

उन्होंने कहा संभाग स्तर पर गुणवत्ता सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे, ताकि शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों के बेहतर परीक्षा परिणाम आयें. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि राज्य सरकार ने तय किया है कि बारहवीं कक्षा में सत्तर प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चों का प्रवेश मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों में होने पर उनकी फीस राज्य सरकार भरेगी. इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, अध्यापक संगठनों के पदाधिकारी दर्शन चौधरी, भरत पटेल, जगदीश यादव, बलराम पवार, राकेश पटेल, जावेद खान, शैलेन्द्र त्रिपाठी, भरत भार्गव, श्रीमती सुषमा, ब्रजेश्वर झारिया सहित बड़ी संख्या में अध्यापकगण उपस्थित थे.



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