मुक्तिधाम के विकास, विस्तार के लिये झोली का सहारा





राकेश प्रजापति की रिपोर्ट 

आदेगाव/लखनादौन. विकासखंड की आदेगाव पंचायत में E&H क्लब के बैनर तले बिगत माह से अपने नगर को बेहतर बनाने हेतु श्रमदान का सन्देश दिया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक रविवार सुबह 7 से 10 बजे तक श्रमदान हेतु लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता रैली भी निकाली जा रही है. परिणामस्वरूप युवाओं ने श्रमदान में हिस्सा लिया व नगर के विभिन्य सार्वजनिक स्थलों में झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया गया तो वही नगर के मुक्तिधाम को साफ सुधारा बनाने हेतु भी एक मुहीम चलाई गई जिसमें श्रमदान के माध्यम से साफ सफाई व वृक्षारोपण का कार्य किया गया. स्थानीय वाशिन्दों ने भी इसमें अपना सहयोग प्रदान किया. बीते दिनों मुक्ति धाम के विकास व विस्तार हेतु एक स्थाई समिति भी बनाई गई, जो लगातार इस कार्य हेतु प्रयासरत है.

शनिवार को नगर के सेठ श्री सीताराम जी नेमा की अंत्येष्टि कार्यक्रम के दौरान मुक्तिधाम को बेहतर बनाने के लिए एक नई प्रथा का आरंभ किया गया, जिसमें अंत्येष्ठि कार्यक्रम में पहुचे नागरिकों के बीच झोली फैलाई गई व सभी से आग्रह किया गया कि अपनी श्रद्धानुसार उसमे राशि डाले जिसमे एक रुपये से लेकर दस, पचास, सौ रुपये तक की मदद नागरिकों ने की, जिसके माध्यम से एक अन्येष्ठी कार्यक्रम में 3800 रुपये की राशि एकत्रित की गई.

यह पहल नरसिंहपुर से पहुचे नेमा समाज के मार्गदर्शन में आरंभ की गई. उन्होंने बताया कि बीते 10 वर्षो से वो इसी तरह झोली फैलाकर लगभग 40 लाख रुपये की राशि एकत्रित कर चुके हैं, जिससे मुक्तिधाम का काफी विकास व विस्तार किया जा रहा है. आदेगाव नगर के बाशिंदों से भी अपील की जा रही है कि किसी भी अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में सम्लित होते समय श्रद्धानुसार दान राशि अवश्य लेकर पहुँचे, जिस राशि से मुक्तिधाम को बेहतर बनाने में सहयोग मिलेगा.

विदित है कि नगर के वाशिंदों द्वारा लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार हेतु पूर्व से ही मांग की जा रही थी, किन्तु पंचायत की लचर कार्यप्रणाली के चलते न तो मुक्तिधाम में समतलीकरण किया गया, न ही बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य किया गया, जिस कारण शमशान की कुछ भूमि में अतिक्रमणकारियों ने अपना अधिकार जमा लिया है, जो लगातार जारी भी है, पर लगता है शासकीय भूमि में अतिक्रमण को बढ़ावा देने का कार्य खुद पंचायत व प्रशासन का है, जो अवैद्य अतिक्रमण को रोकने में असफल रहे हैं.  यही वह कारण है कि अतिक्रमकारियो के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं. 


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