मध्यप्रदेश में कलेक्टर सिर्फ नाम के कलेक्टर, भूल गए मर्यादाएं, खुले आम उड़ा रहे हैं सिविल सेवा आचरण अधिनियम की धज्जियां




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मध्यप्रदेश, जहां इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, वहां प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा किस तरह जिला प्रशासन का भाजपाई करण किया जा रहा है, इसके वैसे तो समय-समय पर उदाहरण सामने आते रहे हैं, लेकिन हाल ही में अपने राजनीतिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा निकाली जा रही एकात्म यात्रा ने कलेक्टर पद के मान सम्मान का ही हनन कर दिया है. यात्रा में कलेक्टर न केवल बढ़ चढ़ कर भाग ले रहे हैं, बल्कि चरण वंदना की पराकाष्ठा पार कर रहे हैं.

 
 
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मध्यप्रदेश में कलेक्टर सिर्फ नाम के कलेक्टर रह गए हैं. वह जिम्मेदार पद की सारी मर्यादाएं भूल कर खुले आम सिविल सेवा आचरण अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं. उन्होंने न केवल सिविल सेवा नियमों की धज्जियां उड़ा दीं, बल्कि आम जनता के बीच यह स्पष्ट संकेत भी दे दिया कि जिलों में पदस्थ कलेक्टर नाम के कलेक्टर हैं. हकीकत में तो वे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं. 



और अब इस हकीकत के उजागर होने के साथ ही इसी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान लगना शुरू हो गया है. जब जिला निर्वाचन अधिकारी ही भाजपा का कार्यकर्ता होगा, तो फिर चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे?

 





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