MP में BJP सरकार पर बड़ा संकट, जा सकती है 116 विधायकों की कुर्सी




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आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में अयोग्य घोषित किए गए जाने से जहां आप पार्टी कानूनी लड़ाई के लिए अदालत की दहलीज पर तो पहुंच गई हैं। 20 विधायकों की नयी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई करेगा। इन विधायकों ने अपनी याचिका में केंद्र की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके जरिए यह लाभ का पद धारण करने को लेकर उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया था। नयी याचिकाएं उन्हें अयोग्य ठहराने के बारे में चुनाव आयोग की सिफारिश को राष्ट्रपति के मंजूर कर लेने पर उनकी पिछली याचिकाओं के निरर्थक हो जाने के एक दिन बाद दायर की गईं इन याचिकाओं में कहा गया है कि राष्ट्रपति और चुनाव आयोग ने अनुचित जल्दबाजी दिखाई है।

इन विधायकों की संसदीय सचिव के पद पर नियुक्ति को लाभ का पद ठहराया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी अयोग्यता के संबंध में समूचा प्रकरण प्रक्रिया को साफ दर्शाता है जिसके तहत उन्हें उनका पक्ष सुने जाने के नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत से वंचित किया गया। उनकी याचिकाओं का जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और जस्टिस ए के चावला की बेंच आज सुनवाई करेगी। वहीं इस मामले में आप पार्टी ने अपने विधायकों को झूठा फंसाने का आरोप भी भाजपा पर लगाया है। जिसको लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। साथ ही आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश में भी विधायकों के लाभ के पद पर पदस्थ होने का मसला एक बार फिर उठाया है।

आप ने बताया कि मध्यप्रदेश में116 विधायकों के लाभ के पद पर पदस्थ है। जिससे मध्यप्रदेश सरकार पर भी संकट के बादल मडऱाने लगे है और उसके 116 विधायकों की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है। इतना ही नहीं यदि इन विधायकों पर कार्रवाई होती है तो एक ही झटके में 116 विधायकों की कुर्सी चली जाएगी। साथ ही प्रदेश से भाजपा की सरकार जाना भी तय हो जाएगा!। आप पार्टी ने इस मामले को लेकर प्रदेश के राज्यपाल के नाम भी ज्ञापन सौंपे गए है। ज्ञापन में आप की ओर से इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई है।

जिला संयोजक विजयराजे परमार के नेतृत्व में मुरैना के डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे गए थे। जिससे बताया गया है कि आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने 04 जुलाई 2016 को राज्यपाल से मुलाकात कर बताया था कि मध्यप्रदेश में 116 विधायक लाभ के पद पर हैं। यह कृत्य नियम से परे है,इसलिए सभी विधायकों की सदस्यता खत्म की जाए,लेकिन डेढ़ वर्ष बाद भी इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि सभी 116 विधायक अभी भी ऐसे पदों पर हैं जो लाभ के दायरे में आते हैं। इसलिए इन विधायकों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जानी चाहिए।

वहीं यदि इस मामले पर कार्रवाई होती तो मध्यप्रदेश सरकार पर संकट के बादल आ सकते है। साथ ही 116 विधायकों की सदस्यता भी खतरे में पड़ सकती हैं!। मालूम हो कि 19 जनवरी को चुनाव आयोग ने 20 विधायकों को लाभ का पद धारण करने को लेकर अयोग्य ठहराने के लिये राष्ट्रपति को अपनी सिफारिश भेजी थी। बाद में राष्ट्रपति ने इसे अपनी मंजूरी दे दी थी जिसके बाद आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
जिस पर आप ने बीते दिनों संकेत दिया कि यदि कोर्ट से उसे न्याय नहीं मिला तो वह फिर चुनाव लड़कर जनादेश हासिल करेगी। वहीं इस मामले में आप पार्टी ने अपने विधायकों को झूठा फंसाने का आरोप भी भाजपा पर लगाया है। जिसको लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं और राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी भेजे जा रहे हैं।
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News Digital India 18

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