खेत को पानी न मिले तो किसान का जीना बेकार -नरोत्तम मिश्रा





''रोगी को दवा न मिलने, आंखों के आगे बेटे के बिलख-बिलख कर मर जाने, सुहागन के विधवा हो जाने, वृद्ध पिता को बेटी के खो जाने, से भी ज्यादा किसान का दर्द होता है। खेत को पानी अगर नहीं मिलेगा तो किसान का तो जीना ही बेकार हो जाता है।''

आज शिवपुरी जिले के अनेक इलाकों में जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने सघन दौरा करते हुए गाँव-गाँव ग्रामीणों से इस प्रकार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने 14 वर्ष पूर्व सिर्फ सात लाख हेक्टेयर में होने वाली सिंचाई को बढ़ाकर 40 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा दिया है। सिंचाई का रकबा दिनों-दिन बढ़ाया जा रहा है। पूर्व सरकार ने सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधा के विस्तार पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया था। जब फसल सूखती है तब किसान के दिल पर क्या बीतती है। मैं किसान के बीच में रहता हूँ, इसलिए दर्द उसी का गाता हूँ। आँख के आगे फसल सूखने का मतलब बतलाता हूँ। किसान की पीड़ा को जानता हूँ।

किसान की पीड़ा प्रथम विजेता के पुरस्कार न पाने, योगी का ध्यान भंग होने, रोगी को दवा न मिलने, आंखों के आगे बेटे के बिलख-बिलख कर मर जाने, सुहागन के विधवा हो जाने, वृद्ध पिता को बेटी के खो जाने, से भी ज्यादा किसान का दर्द होता है। खेत को पानी अगर नहीं मिलेगा तो किसान का तो जीना ही बेकार हो जाता है। इसलिए हमारे मुख्यमंत्री जी ने सबसे ज्यादा ध्यान सिंचाई पर दिया। इतना कार्य इस क्षेत्र में हुआ है कि आप कह सकते हैं कि पहले इस्तेमाल करो, फिर विश्वास करो।

जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र आज शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र के रामपुर चकरा, भरोदा, साखनोर ग्राम पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बेटियों को दी जाने वाली सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने गरीबों के कल्याण के लिए लागू की गई योजनाओं का भी उल्लेख किया। 



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