गरीब बच्चे सो रहे आसमां के नीचे सड़कों पर, गलियों में





हमारे देश में  कई लाख गरीब हैं, जिनके पास अपना घर नही है. अगर एक गरीब को एक घर मिल जाता है तो एक गरीब अपने बच्चो के साथ चैन की नींद सो सकता है. सरकार ने गरीबों को घर देने बनाई योजनाओं में मार्जिन मनी जमा कर बैंकों में मासिक किस्तें बना दीं.


सबाल ये है कि जिस गरीब के पास न खाने है ना पहनने है, वो बैंक का मार्जिन कहां से जमा करेंगे, बैंक की किस्ते कहां से भरेंगे? सरकारी 'अपना घर' योजनाओं का लाभ देश के किसी गरीब को नहीं मिल रहा है. असल में सरकारी 'अपना घर' योजनाओं में संपन्न लोग लाभ ले रहे हैं. गरीब के बच्चे आज भी सड़कों पर,  गलियों में 
आसमान के नीचे सो रहे हैं. 

@ तुलसी सोनार, भोपाल 




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