BPL पात्र घूम रहा है, अपात्र मजे कर रहे हैं, कब सुधरेगी गाँवों की स्थिति?



''गाँव को शौचमुक्त करने के चक्कर में पूर्व सचिव ने 80 ऐसे लोगों के टायलेट बनबा दिये,  जिनका नाम ही सूची में नहीं है. गाँव के आम रस्ते गलियों में गन्दा पानी भरा हुया है, देखकर ऐसा लगता है अभी अभी घंटा, आधा घंटा पहले हल्की बारिश हुई हो. सड़कें 6 माह पहले बनी हैं, अभी से गिट्टी निकल रही है. पता नहीं वर्ष पूरा कर भी पाएंगी या...''

गणतंत्र दिवस पर ग्राम हैदरगड की ग्रामसभा में सम्मलित होने का मौक़ा मिला. नायब तहसीलदार चिडारजी के साथ. तो वहां देखा एक ही कक्ष में सरपंच, पंच एवं ग्रामवासी आधे अन्दर आधे बाहर. खैर लोगों को समझा बुझाकर बाहर नवनिर्मित चबूतरे पर दिन में चौपाल लगी. मुद्दा BPL सूची का वाचन.

न सचिव, न सरपंच बोलने तैयार नहीं. तहसीलदार महोदय ने सूची पढ़ी. तो पता चला सूची में  50 लोग मृत एवं 11 बाहर के और कम से कम 70% अपात्र लोगों के नाम थे, पर सार्वजनिक तौर पर कोई बताने तैयार नही. पात्र व्यक्ति घूम रहा है, अपात्र मजे कर रहे हैं?

सवाल है कि क्या ऐसे ही ग़रीबी दूर होगी या दीनदयाल जी का सपना अन्तिम व्यक्ति को लाभ मिलेगा? गाँव को शौचमुक्त करने के चक्कर में पूर्व सचिव ने 80 ऐसे लोगों के टायलेट बनबा दिये,  जिनका नाम ही सूची में नहीं है. और उनका एक ही रोना भुगतान कराइये. सड़कें 6 माह पहले बनी हैं, अभी से गिट्टी निकल रही है. पता नहीं वर्ष पूरा कर भी पाएंगी या...

चबूतरा बना है, जगह जगह दरारें पड़ गई हैं. बीच गाँव से रास्ता है. जब देखो तब जाम लग जाता है. गाँव के आम रस्ते गलियों में गन्दा पानी भरा हुया है, देखकर ऐसा लगता है अभी अभी घंटा, आधा घंटा पहले हल्की बारिश हुई हो. लोग जिला पंचायत सद्स्य से अपेक्षा करते हैं कि सभी सम्स्याओं का हल हो जायेगा, जो कि पॉवर लैस है. 

पॉवर युक्त विधायक, जनपद अध्यक्ष, सरपंच को कुछ पता ही नहीं कि उन्हें क्या करना है. और प्रशासन को काग़ज़ भरने के अलावा कोई काम ही नहीं है. कुछ अच्छे अधिकारी हैं, जो कुछ करना तो चाहते, पर उन पर ट्रांसफर की तलवार लटकी रहती है या फिर अन्य स्टाफ़ संगठित होकर निपटा देता है. 

''जय गणतन्त्र दिवस''
विदिशा से कैलाश रघुवंशी 

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