बलिया के अस्पताल में मोबाइल टार्च की रोशनी में होता है इलाज


बलिया. देखिये हम पहले ही सीएम्ओ साहब कह दे रहे हैं कि हम लोग सच दिखाते हैं. अगर खबर है तो दिखेगी. अब साफ़ साफ़ बात दिखाना है तो कुछ कड़वा सच तो रहेगा ही. मगर साहब आप नाराज़ न होना. आप नाराज़ हो जाते हैं तो इसीलिये आपको साफ़ साफ़ पहले ही कह दे रहे हैं कि आप नाराज़ न होना आपके कार्यक्षेत्र में मोबाइल के टार्च की रोशनी में सरकारी अस्पताल में इलाज हो जाता है. 

कहने तो तो जनरेटर है, देने को सरकार इसके डीज़ल का पैसा देती है, मगर साहब अब सरकारी कर्मचारी क्या ज़हमत उठाये इसको चालु करने की तो वो मरीजों के तीमारदारो से कह देते है कि तनिक मोबईल्वा जलवा त बस दू मिनट में इलाज हो जाई. कभी कभी तो खुद का ही मोबाइल जला देते है बड़ा सहयोग करते है हम खाली शिकायत नहीं कर रहे है. काफी सहयोग करते है और कभी किसी तीमारदार अथवा मरीज़ का खुद का मोबाइल बढ़िया नहीं रहता है तो वह खुद के मोबाइल को जला (मोबाइल की टार्च जला) देते है.

अब देखिये सीएमको साहेब, पिछली बार हमने आपको एक वीडियो दिखाया था कि आपके सियर प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में कुत्ता काटने के इंजेक्शन के एवज में अर्थ व्यवस्था होती है, आप नाराज़ हो गये थे और कहा कि जो देता है उसके खिलाफ मुकदमा होगा. साहब सही कहा था आपने क्योकि देने के बाद जनता की हिम्मत कैसे हो गई जो शिकायत कर दे. 

आपकी नाराजगी सही थी साहब. उसके बाद आप स्वयं सीयर गये भी थे, सम्बंधित फार्मासिस्ट को आपने खूब डांट भी पिलाई थी. इस बार साहब ये प्रकरण थोडा बड़ा है. ये दस बीस रुपयों वाला प्रकरण नहीं है हम डीज़ल का हिसाब भी नहीं मांगेगे हम यह भी नहीं कहेगे की जेनेरेटर क्यों नहीं चालु किया गया, हम बस इतना जानना चाहते है कि इस रोशनी की वैकल्पिक व्यवस्था का अगर बुरा असर मरीज़ के स्वास्थ पर पड़ा तो उसका जवाबदेह कौन होगा?

अंजनी राय 
news pnn 

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News Digital India 18

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