बंद हो सके झूठा खेल, भारत मांगे सरदार पटेल






तंत्र के आगे गण है मौन
कब, किसकी सुनता है कौन।
फटी चदरिया मैली सी,
रोटी दूर है, दिल्ली सी।

बदल रहा है मेरा देश
कब बदलेगा अपना भेष।
कब आएंगे अच्छे दिन,
कटती रातें, तारे गिन गिन।

बातों से कब होता नाम,
करना होगा कुछ तो काम।
बदले सुर और बदली तान,
कहने में है देश महान।

56 इंच का सीना है,
फिर क्यों बेख़ौफ़ चाइना है।
सरहद पर कटते हैं सिर,
क्यों जाते वादों से फिर।

काला धन तो मिला नहीं,
इसका कुछ भी गिला नहीं।
जीएसटी का सिर पर वार,
न थी अपनी जेब तैयार।

मुश्किल से मिलता है मौका,
अबकी बार तो न दो धोखा।
कितनी की थी तुमसे आशा,
क्यों बदल गई, तुम्हारी भाषा।

बंद हो सके झूठा खेल,
भारत मांगे सरदार पटेल।

'जय हिंद' 

अरुण तिवारी , भोपाल 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc