अच्छी खेती बनी समस्या, तब नीली गैंग उतरी मैदान में



''पानी की उपलब्धता और अच्छी खेती के कारण गांव में गरीबी का कम प्रतिशत भी मुसीबत बन जाएगा किसी ने सोचा नहीं था।'' 

सागर जिले के राहतगढ विकासखण्ड के ग्राम पिपरिया चोर, जो विकासखण्ड मुख्यालय से 7 किमी. दूर है। लगभग 60 घरों की कुशवाहा, राजपूत बाहुल्य बस्ती में पानी की उपलब्धता और अच्छी खेती के कारण गांव में गरीबी का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। म.प्र. ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल पर सभी गरीब परिवारों की महिलाओं को समूह से जोड़ा गया है। गांव में 03 समूह कार्यरत है।

अधिक पैसा आय भी कभी कभी मुसीबत बन जाती है। कहते हैं खासकर गाँव में जहाँ शिक्षा का स्तर कम हो, वहां उत्पादन ठीक हो तो गांव में बुराईयां अपने आप चली आती हैं। गांव में सरलता से उपलब्ध देशी शराब के कारण प्रत्येक परिवार की महिला अपने घर के पुरूषों की नशाखोरी से परेशान थी। गांव की सी.आर.पी. श्रीमति सीता कुशवाहा ने समूहों की बैठकों में प्रस्ताव रखा कि सब महिलाओं को एक जुट होकर गांव से शराब को भगाना है। बस फिर क्या था शराब वैसे भी हर महिला के दुख का काँटा था। महिलाओं ने शराब बंद करने के लिये अवैध शराब की दुकान पर धावा बोला, पहले तो उसे प्रेम से समझाया फिर उसको कलेक्टर कार्यालय जाकर धरना देने, पुलिस को बुलाने साथ ही गांव में सार्वजनिक रूप से 5000 रूपये जुर्माना की धमकी दी। 

फिर क्या था पहला धाबा भय का निर्माण करने में कामयाब रहा, लेकिन फिर भी वो चोरी छुपे शराब बेचता रहा। समूह की महिलाओं ने भी ठान लिया था कि वे अब पीछे नहीं हटेंगी। उन्होने पीने वालों पर 1100 रूपये का जुर्माना ठोकना शुरू कर दिया। गांव का सरपंच महिलाओं के साथ खडा था। श्रीमति सीमा कुशवाहा, ममता, शारदा, सविता गौड, सुनीता कुशवाहा, जानकी, देवश्री, कला, वैजन्ती की पहल पर आज गाँव शराब मुक्त है। 

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