खुल कर क़ानून का उलंघन करिये, ढोंग क्यों?


 सरकार जो आप हैं  

''अब तस्वीरों का क्या वह तो बोलती और दिखती हैं, बस सुनने के लिए कान और देखने के लिये आँखें होनी चाहिए.''
 

सैफई महोत्सव ने तो खूब धूम मचाई थी अब ज़रा गोरखपुर महोत्सव की भी बात कर ली जाए. इन तस्वीरों को ध्यान से देखिये ये गोरखपुर महोत्सव का नृत्य है. जहाँ सरकारों द्वारा बालश्रम के खिलाफ बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं वहीँ इस बड़े कार्यक्रम में खुल कर छोटे बच्चे चाय बेंचने का काम कर रहे हैं. जिला प्रशासन व सरकार को यह सब नहीं दिख रहा, वह तो अपनी टीम को अपने लोगों को सुख भोग करवा रही है, चाय पिलवा रही है. 



यह सब करवाना भी चाहिए, लेकिन ये बताइये ई कमंडल लिये मासूमों को चाय काहे पकड़ा दिए भाई. आप विश्विद्यालय में शिक्षण कार्य चल रहा है तो गुटका बेचवा रहे हैं? मासूमों से चाय बेचवा रहे हैं? जबकि प्रशासन पूरा का पूरा लगा हुआ है और मजे की बात ये है कि बिना पैसे लिये तो आप कुछ अंदर बेंचने नहीं देंगे, ये दुनियां जानती है, फिर इन बच्चों को क्यों बेंचने की परमीशन दिया? क्यों पैसे लिये?

और अगर ये जबरदस्ती घुस गए, तो और भी बड़ी बात है कि सुरक्षा में सेंध भी हो सकती है? कोई बड़ी घटना भी घट सकती है. आपकी अलाव तक ही नहीं सब व्यवस्थाएं गड़बड़ हैं. सवाल यह भी है कि अगर सारा काम पैसे के लिये ही कर रहे हैं तो फिर ढोंग क्यों? खुल कर क़ानून का उलंघन करिये, जनता पर दिखावे से बाज आईए. 

खबर पत्रकार न्यूज़ से
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