आर्यसमाज हिन्दुओं का चौकीदार या चंदाखोर


''इस देश में इतनी रोटियां नहीं हैं, जितने धर्म हैं. हर कोई अपना अलग धर्म बनाए हुए है और दुसरों को गाली देते रहते हैं. यहॉ तक कि राम रहीम जैसे बाबा भी अपना अलग धर्म बनाए हुए थे. रामदास ने भी अलग धर्म बना रखा था. सच तो यह है कि मक़सद सबका एक ही है आम लोगों को मुर्ख बनाना. एक दुसरे को धर्म और जाति के नाम पर लड़वाना और अपनी जेबें भरना, अपना उल्लू सीधा करना.''

आर्यसमाजियों द्वारा हिन्दू-हित की बात करके या हिन्दुओं की चौकीदारी की बात करके कैसे उन्हें छला जा रहा है, इसकी यथार्थता को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद बहस छिड़ी हुई है. बहस खासकर इस बात पर है कि एक ओर तो वह अपने को हिन्दुओं का चौकीदार बता कर आर्थिक सहयोग चन्दा के लिए काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वह हिन्दुओं की कई मान्यताओं का खुलकर विरोध करते हैं.

पोस्ट में बताये अनुसार आर्यसमाज के लोग केवल एक ईश्वर के अतिरिक्त अन्य किसी भी देवी-देवता पर श्रद्धा नहीं रखते. उनकी निंदा में रत रहते हैं. यहाँ तक कि भगवान् शिव, विष्णु, श्री कृष्ण, श्री राम आदि को भी भगवान् मानने अथवा इनकी पूजा करने को भी पाखण्ड कहते हैं. ईश्वर के सभी अवतारों के घोर विरोधी हैं.

आर्यसमाज के लोग हरिद्वार, काशी, मथुरा, कुरुक्षेत्र, अमरनाथ प्रयाग आदि को तीर्थस्थल नहीं मानते. स्वर्ग और नर्क में भी विश्वास नहीं रखते. किसी भी देवता का अस्तित्व ही नहीं मानते. गृह-नक्षत्र आदि के प्रभाव को देखते हुए विवाह या व्यवसाय के प्रारम्भ हेतु शुभ मुहूर्त को भी पाखण्ड बताते हैं. साथ ही जन्मपत्री बनाने व् विवाह हेतु मिलान को भी गलत बताते हैं. मृत्यु के पश्चात श्राद्ध करने को अथवा घर में कोई शान्तिपाठ या मन्त्र जाप कराने को भी वैदिक धर्म के विरुद्ध बताकर निंदा करते हैं.

पोस्ट में दिया गया है कि आर्यसमाज के लोग मूर्तिपूजा सहित मंदिरों को भी पाखण्ड का घर बताते हैं. कावड लाना, हस्तरेखा, नवग्रह पूजा सहित हिन्दुओं की लगभग 90 प्रतिशत मान्यताओं एव परम्पराओं का खंडन करते हैं.

वेद को मानना, किन्तु जो आर्यसमाज द्वारा अनुवादित है केवल उनको. इसी प्रकार उपनिषद आदि ग्रंथों को, जो आर्यसमाज से अनुवादित हैं, केवल उनको ही मानते हैं, क्योंकि उनकी व्याख्या इन्हौने अपने मत के अनुकूल कर रखी है। महाभारत को, रामायण को, मनुस्मृति को भी पूरी तरह सही नहीं मानते. जो-जो इनके मत के अनकूल हो वो सही, बाकी सब गलत. पुराण सहित अनेक ग्रंथों को कूड़ा कहकर उनका निरादर करते हैं.

ये सूची बहुत लम्बी है. वास्तविकता तो यही है कि ये हिन्दुओ का हित इतना नहीं करते, जितना अहित करते हैं. इस्लाम का खंडन करके ये उतना लाभ हिन्दुओं को नहीं पहुचाते, जितना हिन्दुओं का खंडन करके, इस्लाम व् अन्य मलेक्षों को लाभ पहुचाते हैं. अब आप स्वयं तय कर लें, ये कैसे चौकीदार या हिन्दू धर्म के हितेषी हैं?
प्रस्तुति : बलभद्र मिश्रा / सचिन शर्मा की वाल से

 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc