'गणतंत्र दिवस' : जश्न कितना सार्थक?




कलेक्टर ने उससे कहा 'गरीब होके भी तुम देश को नहीं भूले'

मैले कुचैले कपड़ों में कोने में खडे बालक को देखकर कलेक्टर साहब ने उसे पास बुलाया और कहा "आज झंडारोहण देखने आये हो, ये तो बहुत अच्छी बात है, गरीब होके भी तुम देश को नहीं भूले."


लड़का बोला - " साहब, मां दो दिन से बीमार है, इसलिये हम तीनों भाई बहन और मां भूखे हैं, आज जहां जहां से लड्डू मिलेंगें, ले जाउंगा जिससे कुछ तो खायेंगें हम." 


युवा कलेक्टर साहब स्तब्ध रह गये. लड़के को 3-4 किलो लड्डू दिलवाये और बाबू को गाड़ी लेकर साथ जाके उसकी मां को अस्पताल दिखाने व दवा दिलवाने तथा राशन दिलवाने का कहा और बच्चे को कल अपने आॅफिस आने को कहा.

उनके जाने के बाद वह युवा IAS मन में सोचने लगा कि क्या हमारे ये जश्न सार्थक हैं, जब तक लाखों लोग भूखे सोते हों? क्या हम वास्तव में विकास कर रहें हैं? साथ ही उसके चेहरे पर एक दृढ़-संकल्प आकार ले रहा था.


@ राजेन्द्र सिंह, उप निरीक्षक पुलिस


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc