जो कभी तालियां बटोरता था, वो आज तालियां क्यों बजा रहा है?


दिल्ली के सत्ताधारी दल यानि आम आदमी पार्टी की नेशनल काउंसिल की मीटिंग की शुरू हुई. इस मीटिंग से पहले ही पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खां के निलंबन की वापसी और मीटिंग के वक्ताओं की लिस्ट में पार्टी नेता कुमार विश्वास गैरमौजूदगी ने इशारा कर दिया है कि कुमार अब केजरीवाल ‘विश्वास’ पूरी तरह से खो चुके हैं. ऐसे में अब कुमार विश्वास का राजनीतिक केरियर भी हिचकोले खाता दिख रहा है.

एक वक्त भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी में कुमार विश्वास की भूमिका बेहद अहम थी. साल 2011-12 में अन्ना हजारे की अगुआई में चले इस आंदोलन में कुमार विश्वास हर बड़े फैसले का हिस्सा हुआ करते थे. अपनी वाकपटुता और हाजिर जवाबी के चलते हिंदी के कवि कुमार विश्वास ने अन्ना-केजरीवाल की जोड़ी के इस आंदोलन के लिए जनता की खूब तालियां बटोरी थीं.
केजरीवाल के साथ अन्ना हजारे के मोहभंग होने और आम आदमी पार्टी के गठन के बाद पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह और पूर्व आईपीएस किरण बेदी के बीजेपी के खेमे में चले जाने के बावजूद कुमार विश्वास केजरीवाल के साथ ही रहे. हालांकि इस दौरान भी उन पर बीजेपी के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखने के आरोप लगते रहे थे, लेकिन आम आदमी पार्टी में उनकी हैसियत कम नहीं हुई. बड़े से बड़े मसलों पर पार्टी का राय की व्यक्त करने के लिए कुमार विश्वास को ही आगे किया जाता था.
पार्टी के भीतर केजरीवाल के बाद कुमार विश्वास को दूसरा सबसे बड़ा मास अपील वाला नेता समझा जाता था. इसकी बानगी 2014 के लोकसभा चुनाव में भी दिखी थी, जब केजरीवाल बनारस में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने उतरे और कुमार विश्वास को अमेठी राहुल गांधी के खिलाफ पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया. जो कभी तालियां बटोरता था, वो आज तालियां क्यों बजा रहा है, केजरीवाल को करीब से जानने वाले लोग कहते हैं वे पीएम मोदी की ही तरह किसी बात को भूलते नहीं हैं. केजरीवाल, कपिल मिश्रा की बगावत में कुमार विश्वास की भूमिका को अब भी संदेह की नजर से देखते हैं. और उसी वक्त उन्होंने कुमार विश्वास को ठिकाने लगाने का मन बना लिया था. लेकिन वह कुमार विश्वास को सहानुभूति हासिल करने का कोई मौका देना नहीं चाहते थे.
साथ ही उन्हें प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के निष्कासन के बाद मीडिया में हुई छीछालेदर भी याद थी. लिहाजा केजरीवाल ने कुमार विश्वास को पार्टी से निकालने की बजाय उन्हें पार्टी के भीतर ही रखकर उनकी हैसियत को छोटा करने का खेल खेला. 
ग्रेटर नोएडा से आकाश नागर  
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News Digital India 18

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