पद्मावती बालीवुड से अमेठी के गाँव जायस तक


पद्मावती के बहाने से पद्मावत और जायसी तक के नाम नई पीढी ने जान लिए| हम जो सकारात्मक होकर नहीं सीखते वह नकारात्मक होते ही समाज सिखाने लगता है| संजय लीला भंसाली को इस विवाद से कितना लाभ होगा यह तो समय बताएगा,लेकिन तमाम नेताओं की दुकान चल पडी है| अनेक चैनल के नए पत्रकार जायसी तक पहुचने लगे हैं, क्योकि जायसी की बाईट बिकने लगी है| 


कई प्रोफ़ेसर अब पद्मावत का पुनर्पाठ करते हुए दिखाई देने लगे है| कुछ भी हो यह जायसी की अवधी कविताई का ही कमाल है| कई बार जो काम सकारात्मक संवाद नहीं कर पाते वो काम ऐसे विवाद कर जाते हैं| कुछ अधकचरे विद्वान जायसी को भोजपुरी का कवि कहने लगे थे, उनका भी भरम टूटा है| जायसी और उनके पद्मावत की चर्चा बालीवुड से अमेठी के गाँव जायस तक जारी है|

@ भारतेन्दू मिश्रा, दिल्ली 

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