बावरिया के विवादित बयान 'मीडिया सरकार के हाथों बिका हुआ है' से कांग्रेस संकट में


कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया बयान कि 'मीडिया सरकार के हाथों बिका हुआ है. व्यापमं मामले में एक लाइन भी नहीं छापता है और ना डिबेट करता है.' के बाद कांग्रेस संकट में आती दिखाई दे रही है. सारा मीडिया इस बात पर कडा एतराज जता रहा है. और बावरिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 

बताया जा रहा है बावरिया आयातित नेता हैं, अव्वल तो उनका नाम ही हम सबने तब सुना, जब वो एमपी के प्रभारी बने. जबकि हमें देश भर के हर पार्टी के नेताओं के नाम और कीर्तिमान पढने सुनने मिल जाते हैं. इनका नहीं मिला. यानि इसका आशय साफ़ है, बावरिया ने खुद जीवन में कोई तीर मारा नहीं है, जो उन्हें परिचय भरा नाम दे सके.
बताया जा राह है बावरिया को पता ही नहीं है कि व्यापम मामले को कांग्रेस से ज्यादा मीडिया ने उठाया और सरकार की फ़जीहत कर राखी है. मीडिया ने कहा है बावरिया को सरकार के ऊपर आरोप लगाने पर ही फोकस करना चाहिए, क्योंकि यदि वह टेढ़े चले, तो खुद के गिरेबान के अंदर झांककर देखने को मीडिया बाध्य करेगा और फिर वे बावरे होते फिरेंगे. वैसे भी उनकी पार्टी अंतर्कलह में ही बहुत उलझी है. 

मीडिया ने बावरिया के बयान पर सख्त आपत्ति जताते हुए एमपी कांग्रेस के जो संवेदी/ समझदार नेता हैं, उन्हें सलाह दी है कि वे बावरिया जी को बावरे होने से रोकें. कांग्रेस के कई नेताओं ने भी बबरिया के इस तरह के बयान को गलत बताया है.

@ प्रवीण दुवे 
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