रेत सी जिंदगी


@ सुरेखा अग्रवाल, लखनऊ 
हाशिए पर जिंदगी
एक बन्द मुठ्ठी सी
रेत सरीखी जिंदगी
@ सुरेखा अग्रवाल, लखनऊ 

हर्फ़ दर हर्फ़ फ़िसलती
उम्र को चुराती
वह धूमिल सी
बेख़ौफ़ जिंदगी...!
अंजुरी में फ़क़त
अहसास कराती
गति निरंतर आभास
दिलाती,
पल में माशा
पल में तोला
दुःस्वप्न सी वह
धूल में उकेरती
रेत सी जिंदगी
रेत सी रहती
बंद अंजुरी से
पल में खिसकती
कर आगाह आग़ाज से
खुद को फिर उम्र के
अंजाम तक पहुँचाती
यह रेत सी जिंदगी
पल पल फिसलती 
जिंदगी
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News Digital India 18

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