जब कोई और राह नजर नहीं आती..


श्रीमती लक्ष्मी गामड़ संयुक्त कलेक्टर रतलाम
आजकल हर दिन हम सुनते हैं, पढ़ते हैं कि फलां-फलां ने आत्महत्या कर ली। हम सुनते हैं थोड़ी चर्चा करते या ना करते हैं और भूल जाते हैं। बहुत गम्भीर बात है पर हम ये सब अपने आस-पास होते देखते रहते हैं, पर किसी छोर तक पहुँचते नही हैं।
मुझे याद आ रहा है कि 2007 में जब मेरा सिलेक्शन MPpsc 2005 की

प्रीलिम में हो चूका था और मुझे मैन्स exam की तैयारी करनी थी।सोचा कुछ सीखने के लिए इंदौर चला जाये। आपको बता दूँ मेरा ऐच्छिक विषय समाजशास्त्र भी था। एक बात और बता दूँ मैंने उससे पहले कभी समाजशास्त्र नही पढ़ा था। हाँ तो जब मैं कोचिंग के लिए पहुँची। हमारी क्लास में हमे समाजशास्त्र पढ़ाने संजय सिंह सर आते थे जो अभी माधव कॉलेज उज्जैन में प्रोफेसर है। एक दिन उन्होंने हमें कुछ टॉपिक नोट्स बनाके लाने के लिए दिए। हम उस समय 5-7 लोग लगभग साथ एक ग्रुप में रहते थे। तो दोस्तों उस समय मुझे कोन सा टॉपिक मिला होगा,जी बिलकुल सही मुझे "ईमाइल दुर्खीम का आत्महत्या का सिद्धांत"मिला।मैं रात भर सोचती रही क्या लिखूं,क्या नही बार-बार उस सिद्धान्त को पढ़ा पर कुछ समझ नही आया। दूसरे दिन सर ने पूछा कोन -कोन नोट्स बना के लाया मैने सर से एक दिन का समय और माँगा। 
एक बात और बता दूँ उस पूरी क्लास में मैं हमेशा चुप ही रहती थी कभी किसी के साथ घुलमिल नही पाती थी, इसलिए कोई सोच नही पाता था कि मैं क्या हूं। तो दोस्तों जो व्याख्या मैने उस समय आत्महत्या की थी आपको भी बता देती।
आत्महत्या एक लैटिन-suicidium,sui vedere से बना है, इसका अर्थ होता है जानबूझकर अपनी मृत्यु का कारण बनने का कार्य करना।
आत्महत्या के कारण क्या 
हैं-
1. सामाजिक कारण
2. आर्थिक कारण
3. पारिवारिक कारण
4. व्यक्तिगत कारण
1. सामाजिक कारण 

मनुष्य एक सामजिक प्राणी होकर समाज का एक अभिन्न अंग है। जब कोई इन सामाजिक नियमों, रीति-रिवाजों को तोड़ कर बाहर निकलता है तो ये कथित सामाजिक नाम के प्राणी उस व्यक्ति को इतना मजबूर कर् देते हैं कि वो आत्महत्या कर लेता है।
उदाहरण देना चाहूंगी दोस्तों, मुझे आज भी याद है जब मैं 5 वीं कक्षा में पड़ती थी तो मेरे यहाँ एक लड़की कमला (परिवर्तित नाम) ट्यूशन पढ़ने आया करती थी। मुझे भी पापा उनके साथ पढ़ने बैठा देते थे। तब शायद उस लड़की की आयु 17-18 वर्ष रही होगी वह 11 कक्षा की छात्रा थी।वह मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। वो अक्सर मेरी कमर के नीचे आती दोनों चोटियों को देख कर् मेरी माँ से पूछती आंटी इस घोटली की (मेरा निकनेम) चोटी बड़ी सुंदर लगती है और इसके हेयर इतने बड़े क्यों हैं। हा तो अब मुद्दे पर आते 
हैं, तब मैं बहुत छोटी थी और मुझे किसी भी रिश्ते की समझ नही थी। मैं अक्सर उनके घर जाया करती थी जो एक किराये का कमरा था और वो अपने बड़े भाई के साथ वही रहती थी। जब कभी मैं उनके घर जाती मुझे एक लड़का अक्सर वहां दिख जाता था, जो मुझे देखकर हमेशा चला जाया करता था। एक दिन मैं जब कमला दीदी के घर गई तो वो रो रही थी मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या हुआ, फिर अक्सर 1-2 महीने मैंने उन्हें वैसे ही उदास और बिखरते हुए देखा। और एक शाम वो हमेशा के लिए खामोश हो गई। उसके घर के बाहर बहुत भीड़ लगी थी। पुलिस अपना काम कर रही थी, मेरा बाल मन उस घटना की छाप लिए आगे बढ़ता रहा। 
मां ने बताया था कमला दीदी ने आत्महत्या की थी और मेरे प्रश्न का जवाब किसी ने नही दिया की कमला दीदी ने आत्महत्या क्यों की।
फिर पापा के ट्रांसफर के बाद वो बातें भूलने लगी। 1998 में मेरी एक ट्रेनिंग आलीराजपुर में थी और मैं मेरी एक दोस्त से मिलने सोंडवा गई।तब बातों ही बातों में उसने बताया कि कमला दीदी माँ बनने वाली थी और उस लड़के ने समाज के डर से उससे विवाह के लिए इंकार कर दिया।तब मुझे समझ आया कि उसे कितना दर्द हुआ होगा उस वक्त जब उसे इतना कठोर निर्णय लेना पड़ा।तुम मेरी प्यारी दीदी थी कमला दी और तुम मुझमे हमेशा जिन्दा रहोगी।
2. आर्थिक कारण- जब व्यक्ति आर्थिक संकटो में फंस जाता है और उसे कोई राह नजर नहीं आती तो वह आत्महत्या की कगार पर पहुँच जाता है।ऐसा वह तभी करता है जब उसे कहीं से भी मदद की उम्मीद ना हो।
3. पारिवारिक कारण-जब व्यक्ति अपने सम्बन्धो को ठीक से नही निभा पाता व अपनी जिम्मेदारी पर खरा नही उतरता तो वह उस दबाव को झेल नही पाता और आत्महत्या कर् लेता है।
4. व्यक्तिगत कारण-इसमें कई कारण हो सकते है जैसे-अपनी जिद,निर्णय ना ले पाना,असहनशील होना।
मैं उदाहरण के तौर पर बताना चाहूंगी कि हमारे बचपन के कुछ दोस्तों में एक दोस्त ये भी थे।जब हम 12 वीं पास कर् चुके थे तब हमारा ये दोस्त हमारे ही मोहल्ले की एक बेहद खूबसूरत लड़की पे अपना दिल हार् बैठे।महीनों चक्कर लगाने के बाद कही बात बनी। वो दोनों प्यार में थे और बेहद खुश थे।बात तो तब बिगड़ी जब उनके घरवालों को पता चला। बड़ा हंगामा मचा लड़की पर पूर्ण पाबंदी हो गई। हम दोस्तों ने उन्हें मिलाने का बीड़ा उठाया।लड़की को एक दोस्त के घर बहाने से बुलवाया गया ।प्लान बना की हम सारे दोस्त मिलकर उनका विवाह करवा देते है।प्लान बन चूका था और हमे उन्हें लेके जाना था, तब लड़का अचानक डर गया और शादी करने से मना कर दिया। वो निर्णय नही ले पाया।बात बिगड़ गई।उस लड़की के परिवार वालो ने आनन-फानन में उसका विवाह तय कर् दिया। हल्दी लगी, मेहँदी लगी, मण्डप सजा जैसे जैसे वो लड़का ये देखता फुट-फुटकर रोता। बारात आ चुकी थी वो लड़का आके कहता है कि कोई उस लड़की को बुला दो मैं उसके बिना जी नही पाउँगा। आखरी बार वो उस लड़की से मिलता है और कहता है चलो भाग चलते है। अब निर्णय लड़की के हाथों में था उसने मना किया कहा अब ये नही हो सकता मैं उस व्यक्ति को कैसे सजा दूँ जो अपनी आँखों में सपने सजाये मुझे लेने आया है,मैं अपने परिवार को अब कैसे धोखा दूँ जिनने मुझे बनाया है। शायद उस दिन में चल देती साथ तुम्हारे पर अब बहुत देर हो गई तुम लौट जाओ अब हम कभी नही मिलेगें। हम दोस्तों ने उस दर्द को उस पल में जिया था। 

एक तरफ उस लड़की की भाँवरे पड़ रही थी और दूसरी तरफ वो लड़का दूनिया को अलविदा कह रहा था। जब पता चला तो देर हो चुकी थी। इधर रात को लड़की की बिदाई हो रही थी और उधर उसकी चिता सज रही थी।सुबह लड़की ससुराल पहुँच रही थी और लड़का जिंदगी का अंतिम सफर तय कर् श्मशान जा रहा था। उस दिन हम दोस्तों के यहां चूल्हा नही जला था। आज भी वो लड़की हमारे घर आती है, उसकी जिंदगी सामान्य चल रही पर वो बेबाकी वाली खिलखिलाहट अब उसके होंठो पे कभी नहीं  आती। कुछ मेरे दोस्त जब इसे पड़ेंगे तो उनकी आँखों में यह घटना आज सजल हो उठेगी।
आत्महत्या अक्सर एक अस्थायी भाव के कारण आती है। जब हम अवसादग्रस्त होते है तो हम वर्तमान को संकुचित परिप्रेक्ष्य में देखते है।मैने ऐसे भी लोग देखे है जो वो कष्टदायी पल गुजरने के बाद जीने की ईच्छा रखते है। इसे रोकने के लिए हमे इनकी मदद करनी चाहिए ।जब हमारे दोस्त अवसाद में हो तो उन्हें अकेला ना छोड़े। माता-पिता अपने बच्चों के भाव समझे। समाज में कुछ बदलाव भी करे।
जानते हो दोस्त मुझे मैन्स exam में इस प्रश्न के उत्तर में 30 में से 27 नम्बर मिले थे। और मेरे वो नोट्स शायद अब भी संजय सर के पास हो।उस दिन संजय सर ने मुझे कहा था लक्ष्मी तुम इतना अच्छा लिखती हो मुझे पता नही था। और जानते हो दोस्तों उस अकादमी से मैं अकेले ही Dy.Coll. बनके निकली थी।
और जाने से पहले- 

ये जिंदगी बहुत खूबसूरत है उसे भगवान ने हमे वरदान में दी है, यूं आत्महत्या कर उस ऊपरवाले का अपमान ना करना। 
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