बस हम भी जाने वाले हैं, शेष कुशल है

                                   


                             
@ राजीव शर्मा
          
          बिना काम बेचारे बैठे शेष कुशल है 
          घर घर लड़के क्वारे बैठे शेष कुशल है 
          सब फसलें हो गई रुआंसी बादल रूठे 
          नाले सूखे नदियां प्यासी शेष कुशल है 
          गाड़ी ठुक गई भैंसे बिक गईं मिली जमानत 
          पेशी पर पेशी बढ़ती है शेष कुशल है
          बाजारों में सन्नाटा है हर धंधे में बस घाटा है
          जाने कैसा भक्काटा है शेष कुशल है
          गाँव में घर घर पर ताले हैं शहरों में डेरे डाले हैं

          बस हम भी जाने वाले हैं, शेष कुशल है
Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc