40 हजार दिए तब मिल सका प्रियंका को न्याय


यह है जांबाज़ बेटी, जिसने दिखाया बिहार सरकार को आइना

बिहार में सरकारी शिक्षा देश भर में बदनाम है. प्रियंका और उसके घर वालों को सलाम, जिन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपनी लड़ाई लड़ी. एक सवाल यह भी है कि कोर्ट ने भी तब न्याय किया, जब प्रियंका ने 40 हजार जमा करा दिए, यदि वह ऐसा नहीं कर पाती तो न्याय का क्या होता? गरीब बिहारियों के लिए तो सिर्फ दया ही की जा सकती है.

पटना. टॉपर घोटाला कांड के बाद एक बार बिहार की शिक्षा व्यवस्था फिर चर्चा में है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने सहरसा की प्रियंका को गलत तरीके से फेल कर दिया था, पटना हायकोर्ट ने प्रियंका को गलत तरीके से फेल करने पर बिहार शिक्षा बोर्ड पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माने की रकम बिहार शिक्षा बोर्ड प्रियंका को देगा.
बिहार में सरकारी शिक्षा देश भर में बदनाम है. प्रियंका और उसके घर वालों को सलाम, जिन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपनी लड़ाई लड़ी. एक सवाल यह भी है कि कोर्ट ने भी तब न्याय किया, जब प्रियंका ने 40 हजार जमा करा दिए, यदि वह ऐसा नहीं कर पाती तो न्याय का क्या होता? गरीब बिहारियों के लिए तो सिर्फ दया ही की जा सकती है.
मामला 2017 के मैट्रिक की परीक्षा का है, जिसमें 10वीं की परीक्षार्थी प्रियंका सिंह को परीक्षाफल में फेल घोषित किया गया था.  प्रियंका को विज्ञान में 29 अंक और संस्कृत में महज 4 अंक मिले. प्रियंका ने पुनर्मूल्यांकन के लिए चैलेंज किया, लेकिन पुनर्मूल्यांकन में भी वही स्थिति रही. उसे विज्ञान में इस बार 7 और संस्कृत में 9 अंक मिले.
इसके बाद प्रियंका ने हायकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने पहली सुनवाई में कहा कि अगर छात्रा का आरोप गलत हुआ तो 40 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगेगा. कोर्ट के इस शर्त पर छात्रा तैयार हो गई. कोर्ट के आदेश पर उसने 40 हज़ार जमा कर दिए.
कोर्ट के आदेश पर जब याचिकाकर्ता की कॉपी कोर्ट में पेश की गईं, तो कापी में हैंडराइटिंग अलग पाई गईं. दरअसल वो कॉपी याचिकाकर्ता की थी ही नहीं. अदालत के सख्त निर्देश पर जब मूल कॉपी पेश की गई तो उसकी जांच की गई. छात्रा को विज्ञान में 80 और संस्कृत में 61 अंक मिले. इस पर कोर्ट ने बिहार विद्यालय समिति पर पांच लाख का जुर्माना लगाया.

यह भी जान लें कि बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने शेखपुरा में एक कार्यक्रम में स्वीकार किया है कि राज्य में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है. उन्होंने कहा सरकारी स्कूलों में पांचवीं कक्षा का छात्र कक्षा तीसरी का गणित का सवाल हल नहीं कर सकता.

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc