NGT ने उठाया हिंदुओं के शवों को जलाने की परंपरा पर सवाल

शमशान में भी, ये हो क्या रहा है, 
गरीब की बात तो समझ आती है, पर ये जाति???
फोटो : शैलेष गौर 

नई दिल्ली से उमाकांत मिश्रा

दिल्ली में पटाखे बैन के बाद से पिछले कुछ समय से जिस प्रकार से बातें की जा रही थीं, जो सोचा और व्यक्त किया जा रहा था, वही हुआ. राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिंदुओं के शवों को जलाने की पुरानी परंपरा पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए कहा है कि खुले इलाके में मानव अवशेषों के दाह संस्कार की प्रक्रिया से वायु प्रदूषण की ओर बढ़ती है और बाद में यह प्राकृतिक जल संसाधनों को भी प्रभावित करती है.
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए, विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी में, ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार से अंतिम संस्कार के वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराने के लिए कार्यक्रम शुरू करने को कहा है.

दिवाली पर पटाखे वैन के बाद इसे हिन्दू संस्कृति पर एक और हमला है, के रूप में देखा जा राह है. कहा जा रहा है कि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं, जब हिन्दू धर्म ही खत्म हो  जाएगा.

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