इसे कहते हैं मॉडल फेल होना


भारत में MBA सब्जेक्ट की आवश्यकता मुझे तो समझ नहीं आई, नहीं मतलब आप यही सिखाना चाहते हो ना बच्चे बिजनेस कैसे करें, ठीक, सिखा दिया, लेकिन यह सब एक दौर तक ही सीमित रहा लोग सारी बातें समझ गए क्योंकि व्यापार सनातन काल से चला आ रहा है उसके लिए किसी नए अध्ययन की आवश्यकता नहीं है, किंतु लाखों रुपए फीस देकर MBA छात्र अच्छा रोजगार नहीं ढूंढ पा रहेl
आज MBA डिग्रीधारी मॉल में प्रोडक्ट दिखा रहे हैं सर आपके लिए यह अच्छा है मतलब MBA किए हुए पुराने लोग तो आज बड़ी बड़ी कंपनियों के सीईओ बने बैठे हैं लेकिन आज की जनरेशन जो MBA कर रही है वह सिर्फ बेरोजगार हो रही है, आपका विजन फेल हो गया आप की दी हुई डिग्री जो बच्चों का कल्याण कर सकती थी उनका भविष्य सुधार सकती थी किंतु उन्हें अंधकार में ले जा रही है और केवल यही एक डिग्री नहीं है और भी बहुत सारी डिग्रियां हैl व्यापार तो पहले भी होता था सनातन काल से होता आया है तब किसी डिग्री की आवश्यकता महसूस नहीं हुईl 
एक क्षेत्र से व्यापारी घी चना दाल कपास आदि ले जाता था वहां से वहां पैदा होने वाली वस्तुएं खरीद कर अपने क्षेत्र ले जाता था, लोगों की जरूरतें भी पूरी हो रही थी और व्यापारियों का व्यापार भी चल रहा था वह भी प्रेम पूर्वक सौहार्द भरा और छोटे-छोटे गांव में जरूरत का कुछ सामान खरीदना है तो वह अनाज ले जाते थे और आवश्यक वस्तुएं उसके बदले ले आते थेl आज व्यापार सर्वोपरि है किंतु भले ही खरीदार मिले ना मिले, इसे कहते हैं मॉडल फेल होनाl तब प्रेम भी था व्यापार भी था भाईचारा भी था शिकायत भी नहीं थी बेरोजगारी भी नहीं थी क्योंकि उनमें से कोई MBA नहीं था वर्तमान से तो बेहतर ही थाl
                                                                    - आलोक शर्मा, इटावा  
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