बिना मुआवजा खेत में सड़क बनाई, चलो अब उखाड़ो

यही सही किया, कोई और रास्ता नहीं था 
खेत में सड़क बनाना सरकार को पड़ा महँगा
कोर्ट ने कहा 'सड़क उखाड़ो, जमीन किसान को सौंपो' 

सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर लेती है, लेकिन उसे मुआवजा देने में कतराती है. किसानों की जमीन भी उनके पास से चली जाती है और उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता. इसके लिए वे यहाँ वहां भटकते रहते हैं. प्रदेश भर में ऐसे कई मामले बताये जा रहे हैं, लेकिन सभी कोई इस स्तर तक लड़ाई नहीं लड़ पाते. अब इस फैसले के बाद ऐसे पीड़ित किसानों को एक नई राह दिखी है.   (रिपोर्ट डिजिटल इंडिया न्यूज़ डेस्क )


किसान को मुआवजा दिए बिना उसके खेत में सड़क बनाना सरकार को महँगा पड़ गया है. षष्टम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 2 ग्वालियर गुंजन शर्मा ने कृषक शामलिया कुशवाह, रोशन सिंह और कन्हई सिंह कुशवाह
बाद में पीड़ित पक्ष पर पॉवर का दुरूपयोग कर 
दबाब बनाया जाता है
के वाद को स्वीकारते हुए आदेश दिए हैं कि सरकार वादीगण के खेतों में बनाई गयी सड़क को उखाड़कर उसे खेत की शक्ल में वापिस वादीगण को आधिपत्य सौंपे. 
वादीगण ने सरकार पर आरोप लगाया था कि अवैध तरीके से उनकी जमीन पर अतिक्रमण कर सड़क का निर्माण कर लिया गया. और इसका कोई मुआवजा भी उन्हें नहीं दिया गया है. शासन पक्ष का कहना था कि जहाँ सड़क का निर्माण किया गया है वहां पूर्व से ही सड़क थी, इसे न्यायालय ने नहीं माना. न्यायालय ने कहा वादी अपना दावा प्रमाणित करने में सफल रहे हैं.
पत्रकार पियूष पांडे, मंडला की रिपोर्ट के अनुसार मंडला की जनपद पंचायत बिछिया की ग्राम पंचायत माधोपुर में नेशनल हाईवे निर्माण में अधिग्रहित की गई अपनी कृषि भूमि के बदले में मुआवजा की मांग को लेकर दो साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर परेशान हो चुके किसानों ने आखिरकार निर्माणाधीन सड़क में जाम लगा दिया. अधिग्रहण के दौरान किसान को कहा गया था कि जल्द से जल्द उसे मुआवजा दे दिया जाएगा परंतु मुआवजा नहीं दिया गया, और उसके खेत में सड़क बना दी गई. कृषक खेमचंद धनगर ने बताया कि बीते दो वर्षों में
खेत में सड़क बनाने डाला गया चूना और गड़ा दिए खम्बे
अपनी समस्या को लेकर वह विभिन्न शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगा चुका है, परंतु उसे कहीं से भी राहत नहीं मिली.
सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर लेती है, लेकिन उसे मुआवजा देने में कतराती है. किसानों की जमीन भी उनके पास से चली जाती है और उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता. इसके लिए वे यहाँ वहां भटकते रहते हैं. प्रदेश भर में ऐसे कई मामले बताये जा रहे हैं, लेकिन सभी कोई इस स्तर तक लड़ाई नहीं लड़ पाते. अब इस फैसले के बाद ऐसे पीड़ित किसानों को एक नई राह दिखी है. मामले से यह सिद्ध हो गया है कि ऐसा नहीं है कि सरकार कुछ भी करती रहे. बिना मुआवजा दिए आपके खेत में सरकार सड़क बना दे, तो आप भी कर सकते हैं ऐसा.


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc