'ये ज़्यादा खाकर न मर जाएँ', इसलिए कम दिया मुआवजा, झारखंड सरकार का बेशर्म और असंवेदनशील होने का सबूत




राशन भले ना मिले, लेकिन भूख तो बिना 
आधार कार्ड वालों को भी लगती है साहब ....!
आलोक बाजपेयी , इंदौर  

जी अभी त्यौहार का मौसम है और ऐसे में भूख से मौत वाले यानी किसी बेहद गरीब परिवार की त्रासदी की चर्चा आपके उत्सवी मूड को बिगाड़ सकती है. इसलिए आप यहीं से लौट जाएँ और दीपावली की लक-दक रौनक में छप्पन भोग का आनंद लें. झारखण्ड के सिमेडेगा ज़िले में विकलांग पिता और दातून बेचकर जैसे-तैसे पेट पलने वाली कोयली देवी की बेटी संतोषी ने भूख से दम तोड़ दिया। 
परिवार का नाम फरवरी से ही सस्ते अनाज के हितग्राहियों से हटा दिया दिया था, क्योंकि उनका राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक नहीं हुआ था. बेचारी कोयली देवी का परिवार पिछले 6 महीने से काफी विकट स्थिति से जूझ रहा था. क्योंकि राशन कार्ड से राशन मिलना बंद हो गया था. आंगनबाड़ी से डेढ़ वर्षीय प्रकाश को जो कुछ थोडा भोजन मिलता था उसे पानी में घोल कर परिवार गुजारा करता था. मगर बीते दो महीने से यह भी बंद हो गया था. संतोषी कुमारी की दादी बालामती को भी मिलने वाली वृद्ध पेंशन 8 महीने से बंद थी. परिवार के विकट स्थिति आ गई थी. परिवार में सबसे बड़ी बहन गुड़िया काम की तलाश में बाहर गई हुई है. कोयलीदेवी ने सस्ता राशन पाने की फिर कोशिश की, लेकिन उसे भगा दिया गया. आखिर चार दिनों की भूखी संतोषी ने "भात-भात ..." की रट लगाए हुए दम तोड़ दिया.
इस मामले में भाजपा की झारखण्ड सरकार के मुखिया ने एक बार फिर कोयली की गरीब हालत को देखते हुए मात्र पचास हजार रूपये की मदद की घोषणा की है. भाजपा की ही राज्य सरकार मंदसौर में किसान आंदोलन के नाम पर आगजनी और आतंक फैला रहे कथित किसानों के मारे जाने पर प्रत्येक मृतक को एक करोड़ रूपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देती है. लेकिन, जिस घर में खाने लायक दाने न होने एक ग्यारह साल की बच्ची भूख से मर जाए, वहाँ सिर्फ पचास हज़ार रूपये शायद यह सोचकर दिए गए होंगे कि कहीं ऐसा न हों कि ज़्यादा पैसे देने से एकसाथ ज़्यादा अनाज देखकर ये ज़्यादा खाकर न मर जाएँ। झारखंड के मुख्यमंत्री ने सिर्फ 50,000 का मुआवजा देकर अपने पूर्णतः बेशर्म और असंवेदनशील होने का सबूत दिया है.

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc