पहले हमें उसका एड्रेस ढूँढना होगा..


हम गलत पता हाथ में लेकर घूमते रहते हैं और फिर कहते हैं कि जीवन में बहुत परेशानियां हैं, शांति की तलाश जारी है, पर उसकी कृपा नहीं हो रही? असल में हम उस को पहचान ही नहीं रहे.. "वह कहाँ मिलेगा", के पहले हमें उसका सही पता कि वह रहता कहाँ है, यह ढूँढना होगा..


रात के दो बजे थे। एक श्रीमंत को नींद नहीं आ रही थी, चाय पी, सिगरेट पी, घर में कई चक्कर लगाये पर चैन नहीं पड़ा. आखिर मैं थक कर नीचे आया कार निकाली और शहर की सड़कों पर निकल गया. रास्ते में एक मंदिर दिखा सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में भगवान के पास बैठता हूं प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाय. वह आदमी मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, उदास चेहरा, आंखों में करूणता. श्रीमंत ने पूछा " क्यों भाई इतनी रात को?" आदमी ने कहा " मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन का पैसा नहीं है". इस श्रीमंत ने पाकिट में जितने थे, सब उसको दे दिये. गरीब आदमी के चहरे पे चमक आ गयी. बाद में श्रीमंत ने उसे अपना कार्ड दिया और कहा - इसमें फोन नं. और पता भी है, और जरूरत हो तो निसंकोच बताना. गरीब आदमी ने कार्ड वापिस किया और कहा -"मेरे पास एड्रेस है." इस एड्रेस की जरूरत नहीं है सेठजी. आश्चर्य से श्रीमंत ने कहा -"किसका एड्रेस है, क्या तुम मुझे पहचानते हो?" उस गरीब आदमी ने कहा -"मैं आपको नहीं पहचानता, मेरे पास उसका एड्रेस है, जिसने रात को साढ़े तीन बजे आपको यहां भेजा. मित्र महेंद्र कुलश्रेष्ठ जी की वाल से कॉपी-पेस्ट,
लेखक का नाम नहीं मिल सका. पर जिसने भी ये लिखा है उसको सैल्यूट तो बनता है.
वह कहाँ है, और हम कहाँ ढूंढ रहे हैं?

वह कहाँ है, और हम कहाँ जा रहे हैं?

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News Digital India 18

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