गुजरात को छोड़ने के फैसले पर उठे सवाल, तीखी प्रतिक्रिया


नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा और गुजरात को छोड़ देने के लिए चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाने लगे हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी आलोचना की जा रही है. कहा जा रहा है आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि चुनाव आयोग ने गुजरात पर अपना फैसला छोड़ दिया. उल्लेखनीय है कि अब तक हिमाचल प्रदेश और गुजरात के एक साथ चुनाव कराये जाते रहे हैं. 

कहा जा रहा है गुजरात में आखिर ऐसी क्या आपदा आ गयी है या कौन से आपदा राहत कार्य चल रहे हैं. कवि अखिलेन्दु अरजरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने में लिखा है-

वोटिंग तिथि घोषित हुई, छोड़ दिया गुजरात,
मात्र हिमाचल की करी, समझ न आई बात.
समझ न आई बात, नतीजा तिथि बतलाई,
पर चुनाव किस रोज? नहीँ घोषित है भाई.
कहें "अखिल" कविराय, नमो कुछ जुमले बाँटें?
निर्वाचन आयोग, चरण क्या उनके चाटें?

गुरुवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया. राज्य में एक ही चरण में 9 नवंबर को वोटिंग होगी और 18 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी. देश में हिमाचल ऐसा पहला राज्य होगा, जहां सभी पोलिंग स्टेशनों पर VVPAT पोलिंग स्टेशन पर वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (VVPAT) मशीन का इस्तेमाल होगा. चुनाव की घोषणा के साथ ही हिमाचल में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए अभी तारीखों का ऐलान नहीं किया है. हालांकि ये तय माना जा रहा है कि गुजरात चुनाव भी 18 दिसंबर के पहले ही होंगे. 

मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने बताया है कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव के लिए बड़ी तैयारी की गई है. वहीँ गुजरात को छोड़ने के लिए आयोग को तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है. 

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