नोटबंदी GST का असर, न्यू मार्केट में पसरा है 'निल बटे सन्नाटा'


दिवाली की एक व्यापारी खासकर बड़ी तैयारी करता है. अपनी दुकानें दुल्हन की तरह सजा लेता है, और फिर ग्राहकों की सेवा. लेकिन इस बार नोटबंदी और उसके बाद GST ने सबकी कमर तोड़ कर रख दी है. दिवाली सामने आ गयी है, लेकिन भोपाल के सबसे व्यस्ततम मार्केट न्यू मार्केट में इन दिनों पसरा है 'निल बटे सन्नाटा.' आज डिजिटल इंडिया न्यूज़ की टीम ने न्यू मार्केट का जायजा लिया और स्थिति देखी. 


भोपाल. सबसे पहले तो गाडी खड़ी करने जगह मिल जायेगी कभी कोई सोच भी नहीं सकता, लेकिन गाडी पार्किंग के लिए जगह आराम से मौजूद थी, गाडी लगाई, सामने ही सारा माजरा समझ आ गया, मार्केट खाली पड़ा था. रूपमती से टॉप एन टाउन तक सारी गैलरी, जिसमें सामान्य दिनों में भी भारी भीड़ रहती है, आज धनतेरस के दिन शाम 6 के बाद भी खाली पडी थी. अन्दर गए तो अमूमन सब जगह यही स्थिति थी. 
चुपचाप से बैठे हैं दुकानदार 

दुकानदारों से बात भी कि उनका साफ़ कहना रहा  कि पहले नोटबंदी और
अन्दर के रस्ते जहाँ पैर रखने जगह नहीं
मिलती थी सामान्य दिनों में भी
आज खाली नजर आये.
फिर रही सही कसर GST ने पूरी कर दी है. एक बात और ख़ास रही, दुकानदार यह स्थिति पहले से समझ रहे थे, सो उनका कहना था कि हमने कोई ख़ास साज सज्जा पर खर्च नहीं किया. दुल्हन की तरह सजा लेते और फिर बाराती (ग्राहक) ही नहीं आते, तब क्या होता. दुकानदार आराम से सामान्य दिनों की तरह थे, कोई ग्राहक आता है तो ठीक नहीं आता तो ठीक. दुकानदारों में भी कोई उत्साह जैसी बात नहीं पाई गयी. 
एक दुकानदार का कहना था, आप मीडिया वालों ने ही चढ़ाया है, अब आप ही उतारो. 







संतोष वस्त्रालय के अविनाश जैन बताते है कि निश्चित ही नोट बंदी और फिर GST ने बाजार की, आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है. 




वस्त्र व्यवसायी सुनील साहू भी कहते हैं कि निश्चित रूप से हालात खराब हैं. सरकार को कुछ करना चाहिए, जनता को उसके हाल पे छोड़ देना उचित नहीं ..



शाही लिबास रेमण्ड शोरूम संचालक प्रकाश मूलानी ने बताया कि जिस स्पीड से ये नोटबंदी वाले ऊपर चढ़े हैं, उसी स्पीड से नीचे भी आना चाहिए. उनका कहना रहा इन्हें मीडिया उठा रहा था, अब मीडिया ही गिराने का काम भी करे. 
रूपमति से टॉप एन टाउन
मुख्य लाइन आज खाली पडी थी.



यहाँ घूम रहे ग्राहकों से भी टीम ने बात की उनका कहना रहा 'दुबली में दो अषाढ़' जैसी बात हो गयी है. मतलब वैसे ही हालात अच्छे नहीं थे, ऊपर से नोटबंदी और कसर थी तो GST लगा कर पूरी तरह काम लगा दिया गया है. 


क्या व्यापारी, क्या ग्राहक सब तरफ सरकार से गहरी नाराजगी व्यक्त की गयी.



ले लो 'कमल का फूल' हम तो कोई GST नहीं ले रहे पर, 
पता नहीं क्यों, हमसे 5/- में भी 'कमल का फूल' नहीं ले रहे

ग्राहक अन्दर दुकानदार बाहर, उसे पता है, सब केवल देख देख कर ही तो जा रहे हैं. 


मिठाई तरफ भी नहीं देख रहे लोग 
मिट्टी के दिए भी कर रहे हैं उदास



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