छोटे कारोबारियों को जीएसटी के झमेले में डालना निश्चित रूप से गलत, बड़े बदलाव की जरूरत




"जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ही काफी लम्बी है, वह सरल की जाए. दुसरे छोटे कारोबारियों को इससे पूरी तरह मुक्त रखा जाए. ऐसे कारोबारी जो कर के दायरे में में नहीं आते, उनको अनावश्यक हर तीन माह में NIL रिटर्न दाखिल करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि जो लोग मामूली रोजगार करके अपना किसी तरह घर चला रहे हैं, उन्हें जीएसटी के झमेले में डालना निश्चित रूप से गलत है. और इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे. "


नई दिल्ली. एक जुलाई को एक देश, एक कर का सपना साकार हो गया, लेकिन आज चार माह हो गए हैं, जीएसटी को लेकर आज भी स्थिति साफ़ नहीं हुई है. व्यापारी विरोध कर रहे हैं. राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया ने जीएसटी लागू होने के कुछ समय बाद ही विरोध बढ़ने पर ट्विट कर कहा था कि किसी को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने ट्वीट कर सात बिंदुओं पर व्यापारियोें की दिक्कतों को दूर करने की कोशिश भी की. लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है. और अब श्री अढ़िया खुद ही जीएसटी दरों में पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत है, बता रहे हैं.
श्री अढ़िया द्वारा बताये अनुसार 1. इनवॉयस सिर्फ कंप्यूटर या इंटरनेट पर आवश्यक नहीं है, इनवॉयस मैन्यूली भी बनाया जा सकता है. 2. जीएसटी के तहत व्यापार के लिए हर वक्त इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी, इंटरनेट की जरूरत मंथली रिटर्न फाइल करने के समय होगी. 3. यदि आपके पास व्यापार करने के लिए प्रोविजनल आइडी है, तो आपकी फाइनल आइडी का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, प्रोविजनल आइडी ही आपका फाइनल GSTIN है. 6. छोटे व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करते समय हर इनवाइस की जानकारी देनी होगी. बी 2 सी बिजनेट रिटेल व्यापार में टोटस सेल्स के समरी का उल्लेख करना होगा. 4. अभी तक आप कोई ऐसा व्यवसाय करते थे, जो कर के दायरे में नहीं था, तो अब व्यापार को शुरू करने के लिए नए रजिस्ट्रेशन की जरूरत होगी. आप अपने व्यापार को जारी रख सकते हैं लेकिन तीस दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. 5. हर महीने तीन रिटर्न फाइल करना होगा. एक ही रिटर्न के तीन हिस्से हैं. जिसमें पहला पार्ट डीलर को भरना होगा, जबकि दो पार्ट कंप्यूटर के द्वारा भरा जाएगा.
7. आपको लगता है कि वैट की अपेक्षा जीएसटी की दर ज्यादा है, तो बताया गया है कि ऐसा इसलिए ज्यादा दिखाई दे रहा है क्योंकि पहले एक्साइज ड्यूटी और दूसरे कर इनविजिबल थे, लेकिन अब इन करों को जीएसटी में शामिल कर लिया गया है.
उन्होंने कहा है कि नए वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने के बाद अब लघु और मझौले उद्योगों के बोझ को कम करने के लिए कर दरों में पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी प्रणाली को स्थिर होने में करीब एक साल लगेगा. जीएसटी में एक दर्जन से अधिक केंद्रीय और राज्य लेवी जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट समाहित कर दिए गए हैं. इस नयी कर प्रणाली से प्रारंभिक टूर पर परेशानियां सामने आईं हैं. हालांकि परिषद ने लघु और मझौले कारोबारों को करों का भुगतान करने और जीएसटी दाखिल करने को आसान बनाने के लिए इसके कई पहलूओं में हल्के बदलाव किए हैं. इसके अलावा निर्यातकों के रिफंड प्रक्रिया को भी आसान बनाया है, लेकिन अभी भी "इसमें अमूल-चूल बदलाव की जरुरत है. इन बातों का व्यापारियों पर कोई फर्क नहीं पडा है. खासकर जो बड़ी संख्या में छोटा व्यापारी है, वह जीएसटी के चक्कर में ज्यादा ही परेशान है. छोटे व्यापारियों का कहना है कि इस जीएसटी के चक्कर में सारा धंधा चौपट हो गया है. उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए फिटमेंट कमेटी को गणना करने की जरूरत होगी, जो वह कर रही है. यह तय हो कि किस वस्तु की दर को तर्क संगत बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि समिति अपने सुझावों को जीएसटी परिषद के सामने यथाशीघ्र रखेगी. जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में गुवाहाटी में 10 नवंबर को होनी है. जहाँ कहा जा रहा है कि सुधार/बदलाव के बारे में कुछ निर्णय लिए जा सकते हैं. सबसे ख़ास तो यह है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ही काफी लम्बी है, वह सरल की जाए. दुसरे छोटे कारोबारियों को इससे पूरी तरह मुक्त रखा जाए. ऐसे कारोबारी जो कर के दायरे में में नहीं आते, उनको अनावश्यक हर तीन माह में NIL रिटर्न दाखिल करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि जो लोग मामूली रोजगार करके अपना किसी तरह घर चला रहे हैं, उन्हें जीएसटी के झमेले में डालना निश्चित रूप से गलत है. और इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे.
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