इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों, ग्रामीण इलाकों में वायरल का कहर, बचाव का एक सरल उपाय


इंदौर से डॉ. प्रमेन्द्र ठाकुर 
इंदौर सहित प्रदेश के अन्य कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में वायरल फीवर का कहर बरपा हुआ है खासतौर पर इंदौर में तो एक तिहाई से भी अधिक जनता इस बुखार से ग्रस्त हो चुकी है. यह बुखार मच्छर के काटने से होता है और अधिकतर लोग इसे चिकुनगुन्या बुखार समझ रहे हैं, लेकिन इस बुखार के लक्षण सिर्फ़ एक बुखार के लक्षणों की तरह नहीं है।
जिस किसी को भी मच्छरों के काटने से यह बुखार आता है तो पहले तीन दिन तो व्यक्ति की हालत इतनी खराब होती है कि ना तो खडा हो पाता है या चल फिर पाता है और ना ही वह ठीक ढंग से होश में रहता है, कहने का अभिप्राय है कि पहले तीन चार दिन हालत बहुत खस्ता रहती है, जब व्यक्ति चिकित्सक को दिखाता है तो वह खून की कुछ जाँचें करवाता है और इन जाँचो में ल्यूकोपिनीया ( रक्त में WBC की कमी ), प्लेटीलेट की कमी पायी जाती है और साथ में तेज बुखार कंपकंपी के साथ आता है और इसके हाथ पैरो और शरीर के जोड़ों मे दर्द शुरू हो जाता है, इनमे से प्लेटीलेट की कमी डेन्गू जैसा लक्षण है, रक्त में WBC की कमी और जोडो मे दर्द चिकुनगुन्या जैसे लक्षण है और ठंड देकर तेज बुखार आना मलेरिया जैसे लक्षण हैं कहने का मतलब है कि यह बुखार किसी एक बुखार जैसा नहीं है, यह इस बात से भी साफ हो जाता है कि डेन्गू, चिकुनगुन्या और मलेरिया के लिए की गई जाँचों के परिणाम नकारात्मक आ रहे हैं।

इस बुखार में दवाइयां तो आप चिकित्सक को दिखाकर और उसकी सलाह से ही ले क्योंकि एक चिकित्सक ही उचित इलाज कर सकता है। लेकिन हम चिकित्सक के बताये इलाज के साथ गिलोय का भी उपयोग कर सकते हैं. गिलोय की बेल मिल जाये तो उसे कूट कर उससे तीन गुने पानी में धीमी आंच पर उबाल लें जब पानी आधा रह जाये तो छान कर पी लें, अगर गिलोय की बेल नहीं मिले तो गिलोय की टेबलेट या गिलोय का चूर्ण शहद के साथ ले सकते हैं, यह खासतौर पर जोड़ों के दर्द में बहुत लाभदायक है। 
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News Digital India 18

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