देश फिर से सोने की चिड़िया बन गया है, अंग्रेजो लौट आओ





" देश में कोई और समस्याएं तो हैं ही नहीं.. न कोई किसान परेशान होकर आत्महत्या कर रहा, न ही कोई शिक्षा से
वंचित है. न ही कोई बच्चा पढ़ने की नादाँ उम्र में बड़े बड़े ट्रक के टायर खोलकर पंचर जोड़ रहा, कचड़े में भविष्य तलाशते
बच्चे तो अब दिखाई ही नहीं देते. और भ्रष्टाचार तो दूर दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा???? जश्न मनाये जा रहे हैं.
देश फिर से सोने की चिड़िया बन गया है, अंग्रेजो लौट आओ, क्यों चले गए...."



दिल्ली से पत्रकार आकाश नागर जी ने लिखा है  

'वो 60 साल का हिसाब मांगेंगे, राहुल गांधी आप साढ़े तीन साल के हिसाब पर अड़े रहना'

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ एक कैंपेन चला था. अड़े रहना हैशटैग पर लोग तंज भरा ट्वीट और फेसबुक पोस्ट कर रहे थे. लोगों ने तीखे और मारक लेकिन मजेदार ट्वीट और पोस्ट किए. 
किसी ने लिखा- ‘वो कहेंगे न्यू इंडिया बनाएंगे, तुम अच्छे दिन की डिलीवरी पर अड़े रहना’. किसी ने कहा- ‘वो तुम्हें गाय-गोबर पर ले जाएंगे, तुम रोजगार, महंगाई, महिला सुरक्षा और जीडीपी पर अड़े रहना’. 

कोई बोला- ‘वो तुम्हारे हाथ में स्वच्छ भारत का झाड़ू पकड़ाएंगे, तुम नौकरी के लिए अड़े रहना’. किसी की सलाह थी- ‘वो तुम्हें 2022 के सपने दिखाएंगे, तुम 2014 के वादों पर अड़े रहना’. ये तो सोशल मीडिया की क्रिएटीविटी है, लेकिन असल में बात अड़ने की ही है. कांग्रेस भी अपनी बात पर अड़ी है और बीजेपी भी.

कांग्रेस नोटबंदी पर अड़ी है कहती है कि नोटबंदी मोदी की बनाई आर्थिक तबाही है. नोटबंदी की वजह से मोदी सरकार ने लोगों का भरोसा खो दिया है. बीजेपी भी अड़ी है कहती है नोटबंदी सरकार का अहम फैसला रहा. इसकी वजह से कालेधन के साम्राज्य को खत्म करने में मदद मिली. लाखों शेल कंपनियां एक झटके में साफ हो गईं. करोड़ों के कालेधन के लेनदेन पर रोक लग गई. 

कांग्रेस जीएसटी पर अड़ी है. कहती है कि जीएसटी टैक्स आतंक की सुनामी है. जीएसटी से लाइसेंस राज का आतंक फिर से लौट आया है. जीएसटी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है. बीजेपी कहती है जीएसटी मोदी सरकार का मजबूत फैसला है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे.

बीजेपी के नेताओं की राय में जीएसटी वो पुराना जूता है जो तीन दिन तो काटेगा लेकिन उसके बाद बिल्कुल फिट रहेगा. जीएसटी की वजह से टैक्स का दायरा बढ़ा है. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताते हैं. बीजेपी इसका जवाब वैट से देती है. वैट माने- वाड्रा ऐडेड टैक्स. दोनों ही पार्टियां अपनी बात पर अड़ी है.
इस पर एक पाठक की प्रतिक्रिया है कि 
" देश में कोई और समस्याएं तो हैं ही नहीं.. न कोई किसान परेशान होकर आत्महत्या कर रहा, न ही कोई शिक्षा से वंचित है. न ही कोई बच्चा पढ़ने की नादाँ उम्र में बड़े बड़े ट्रक के टायर खोलकर पंचर जोड़ रहा, कचड़े में भविष्य तलाशते बच्चे तो अब दिखाई ही नहीं देते. और भ्रष्टाचार तो दूर दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा???? जश्न मनाये जा रहे हैं फिर से देश सोने की चिड़िया बन गया है, अंग्रेजो लौट आओ, क्यों चले गए...."


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