बौद्ध नहीं, मुस्लिम बनिए बहन मायावती जी


जी हाँ, अपना राजनीतिक वजूद वापिस पाने के लिए आज उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती ने जातिवाद का नया दांव खेला है. एक सभा में बहन जी ने घोषणा कर राजनीतिक सनसनी फैला दी है कि अगर देश से जातिवाद खत्म नहीं हुआ तो वह हिन्दू धर्म का त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लेगी. 
बहन जी से मेरा एक सवाल यह है कि वह कौन सा नेता था, जो विधानसभा चुनावों से पूर्व अपनी जाति के मतदाताओं की सीधी बोली लगाता था? बहन जी भूल गई क्या आप उन दिनों को, जब किसी भी धनाढ्य उम्मीदवार को टिकट देने से पहले आप यह कहा करती थीं कि "इस विधानसभा में मेरे (एक जाति विशेष) के मतदाताओं की संख्या इतनी है. हम इतनी वोट तुम्हें दे रहे हैं. बताओ क्या दोगे?" यह भी याद नहीं रहा कि भारतीय राजनीति में जातिगत वोटरों की सौदेबाजी का नया अध्याय तो आपके द्वारा ही शुरू किया गया था?

आज जब वह बेचारे तुम्हारे द्वारा अपने बिकने का सच जानकर दुसरी पार्टी के पाले में चले गए तो तुम्हें जातिवाद याद आ रहा है? अगर तुम्हे जातिवाद की राजनीति के बहाने धर्म ही बदलना है तो बौद्ध धर्म की बजाय मुस्लिम धर्म अपनाओ. कम से कम तुम्हें मुस्लिमों का एकमुश्त वोट तो मिलेगा, जिस तरह तुम्हें पहले दलितों का मिलता था?
@ आकाश नागर 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc