हाई कोर्ट ने कहा- मुहर्रम के दिन भी होगा दुर्गा मूर्ति विसर्जन

ममता बनर्जी का तुगलकी फरमान रद्द, तिलमिलाई ममता ने कहा -
"कोई मेरा गला काट सकता है, लेकिन यह नहीं बता सकता कि मुझे क्या करना चाहिए"
(कृष्ण कुमार दुसाद)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुहर्रम के जुलूस के साथ दुर्गा मूर्ति के विसर्जन पर रोक लगा दी थी. इस पर आज गुरूवार दोपहर कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा है कि मुहर्रम के दिन भी रात 12 बजे तक मूर्ति विसर्जन किया जा सकेगा. हाई कोर्ट ने इस संबंध में ममता बनर्जी सरकार के सभी आदेश खारिज कर दिए.
कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था, 'कुछ भी गलत होने की आशंका के आधार पर धार्मिक मामलों पर बंदिश नहीं लगा सकते हैं. आपके पास अधिकार हैं, पर असीमित नहीं. आप सभी नागरिकों को बराबरी की नजरों से देखें.
फैसले पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि 'ममता बनर्जी तुष्टिकरण की राजनीति को कब छोड़ेंगी. उन्हें मुस्लिम वोट बैंक की चिंता है, पर उन्हें पश्चिम बंगाल की संस्कृति से कोई मतलब नहीं है.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जिस तरह से पश्चिम बंगाल में सरकार चला रही हैं, मानो वह कानून और हाई कोर्ट से ऊपर हो गई हैं. ममता सरकार को पहले भी हाई कोर्ट से ऐसे मामलों में फटकार मिलती रही है, पर ये आदतों से बाज नहीं आ रही हैं.
वहीँ मुहर्रम के दिन ही दुर्गा प्रतिमा विसर्जन कराने वाले आज आये कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर बेहद सख्त बयान दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक ममता बनर्जी ने तल्ख़ टिप्पणी की है कि "कोई मेरा गला काट सकता है, लेकिन कोई मुझे यह नहीं बता सकता है कि मुझे क्या करना चाहिए। शांति बनाए रखने के लिए मैं वह करूंगी जो कर सकती हूं."
ममता को झटका देने वाली कोर्ट की 10 सख्त टिप्पणियां
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुहर्रम पर मूर्ति विसर्जन पर रोक के फैसले को पलटते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को तगड़ा झटका दिया है. इस मामले में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुहर्रम के दिन रात बारह बजे तक दुर्गा मूर्ति का विसर्जन किया जा सकेगा. कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को और ज्यादा समझने के लिए इन 10 प्वाइंट को पढ़ें.
1. मुहर्रम पर मूर्ति विसर्जन पर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, 'कुछ भी गलत होने की आशंका के आधार पर धार्मिक मामलों पर बंदिश नहीं लगा सकते हैं.
2. कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपके पास अधिकार हैं, पर असीमित नहीं. आप सभी नागरिकों को बराबरी की नजरों से देखें.
3. हाई कोर्ट ने कहा, धार्मिक मामलों में सरकारें किसी भी तरह के दखल देने से बचें.
3. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है. कोर्ट ने कहा कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे.
4. चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, सरकार को प्रतिबंध लगाना तो सभी पर क्यों नहीं लगाया. सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं. सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होगा.
5. सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है. वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी. हाई कोर्ट की बेंच ने इस दलील को सिरे खारिज कर दिया.
6. हाई कोर्ट ने कहा पूजा-पाठ वर्षों से चलते आ रहे हैं, ऐसे में मामलों में दखल की गुंजाइश नहीं होती है.
7. कोर्ट ने कहा कि आप दो समुदायों के बीच दरार क्यों पैदा कर रहे हैं. दुर्गा पूजा और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है उन्हें साथ रहने दीजिए.
8. किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक एकता को कायम रखने वाले फैसले ले.
9. धार्मिक मामलों में किसी मुश्किल से निपटने के लिए सरकार को अपने तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए न कि संभावनाओं पर काम करना चाहिए.
10. आखिर में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, मुहर्रम के दिन भी रात 12 बजे तक दुर्गा पूजा करने वाले लोग मूर्ति विसर्जन कर सकेंगे. साथ ही सरकार की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए.
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