ऐसा न हो कि गलत और बेईमान लोग, सही लोगों को बेईमान में चिन्हित कर दें


आज मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मैदानी अफसरों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान काफी कड़क आबाज में पेश आये. कॉन्फ्रेंस के बाद कहा जा सकता है कि सरकार को २०१८ के चुनाव की चिंता सताने लग गयी है. 
बेईमानी करने वालों की सरकार में कोई जरूरत नहीं, जनसुनवाई कर्मकांड बनकर न रह जाए, निजी अस्पतालों में लूटमारी न हो, पुलिस सड़क पर दिखनी चाहिए और यह समय छुट्टी का समय नहीं है, जैसी बातें करके मुख्यमंत्री जी ने यह दिखा दिया है कि सरकार को पता सब है कि जनसुनवाई ठीक से नहीं हो रही, अस्पतालों में लूटमारी हो रही है, सीएम हेल्पलाइन और समाधान ऑनलाइन जैसी योजनायें भी जनता की समस्याएं ठीक से निराकृत नहीं कर सकीं. उन्होंने माना कि कई मामले ऐसे हैं, जिनमें लोग परेशान होते हैें.
इसी के साथ उन्होंने जो प्रमुख बात कही है, वह यह कि बेईमानी करने वालों की सरकार को कोई जरूरत नहीं, उन्हें चिन्हित किया जाए और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की कार्यवाही की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लेकिन सवाल यह है वो कौन लोग हैं, जो यह चिन्हित कर सकेंगे कि कौन भ्रष्टाचार कर रहा है या कौन बेईमान है. 
पिछले दिनों ऐसे कई मामले आये हैं जब सरकार का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल रहा है. हाल में किसान आन्दोलन ने तो जैसे सरकार की हवा ही निकाल कर रख दी. अब भी यह अवश्य देख लें कि यह चिन्हित करने में ऐसा न हो कि गलत और बेईमान लोग कहीं सही लोगों को, बेईमान में चिन्हित न कर दें, नहीं तो रही सही कसर भी पूरी हो जाए. अभी जो चल रहा है वह तो ऐसे ही संकेत दे रहा है. धरातल पर योजनायें भी इसीलिए फेल हो रही हैं.
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