पर्दा उठ चुका था और सामने पुलिस तैनात


जब कोई भी विकल्प नहीं रहा तो कामिनी संत शोभाराम जी के आश्रम में आ गई. एक्सीडेंट में हुई पति की मौत के बाद वह बिल्कुल असहाय हो गईं थी. उपर से इकलौती बेटी की परवरिश.  आश्रम में कामिनी संत महाराज की विशेष दासी बना दी गई. उसकी खूबसूरती ही उसकी योग्यता का सबब बना. संत जी महाराज उसका शारीरिक शोषण करते रहे और वह चुपचाप सहती रही. प्रवचन में हजारों की भीड़ को देखकर कभी विरोध का साहस नहीं हुआ, पर मन ही मन यह जरूर कहती - 'ये सारे लोग या तो बेबकूफ हैं या पागल. भगवान का सच उन्हें कहां मिलेगा जो इंसान के सच को नहीं पहचान सकते. सबके आंखों पे पर्दा पड़ा है.
कामिनी की बेटी गर्मी की छुट्टियों में मां से मिलने आई. पितातुल्य संत महाराज का चरण स्पर्श की. आशीष हेतु संत महाराज जी के हाथ सिर्फ सर पे ही नहीं बल्कि उसके गालों पे भी फिरने लगे. कामिनी तब सहम गई . संत महाराज की आंखों में वही हवस देखी, जो पहली बार अपने लिए देखी थी.
संत महाराज दीक्षा हेतु उसे अपने कमरे में ले जाने लगे. सारी असलियत से अनभिज्ञ सांवली भी तैयार हो गईं तभी कामिनी ने तुरंत कहा - " महाराज, सांवली अभी अभी जवान हुई है. कल रात ही मासिक हुआ है. ऐसी हालत में पूजा की बेदी पे कैसे बैठ सकती है. बस दो चार दिन रूक जाइए. तर्क सटीक लगा, अतः महाराज मान गये.
प्रातः जब संत महाराज जी ने टी वी आॅन किया तो हर चैनल पे कामिनी एवं सांवली को देखकर हैरान हो गये. कामिनी की आपबीती कहानी, सांवली के आंसू और जनमानस का रोष.  संत महाराज जब तक संभल पाते, सायरन की आवाज सुनाई पड़ी. सामने अब कोई विकल्प ही नहीं रहा. सच्चाई पर से पर्दा उठ चुका था और सामने पुलिस तैनात.
                                                                               - सेवा सदन प्रसाद, रांची 

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