जो मरने को छोड़ गए थे झाँसी बाली रानी को


अपने आपको महाराज समझने बाले एक राजनेता की मुख्यमंत्री बनने की छटपटाहट पर एक कविता के रूप में कवि श्री सुमित जी ने मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेता श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर गंभीर शब्दबाण से प्रहार किया है. 2018 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह सब इसी की शुरुआत माना जा रहा है. 
उल्लेखनीय है पिछले दिनों मुख्यमंत्री श्री शिवराज जी द्वारा एक कार्यक्रम में सिंधिया परिवार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. और तब से ही यह मुद्दा बना हुआ है. 
खैर देखिये कवि महोदय की फेसबुक वाल से वायरल हो रही कविता 
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फिर सत्ता की चाह जगी है , गद्दारी के पानी को
बाहें करना चाह रही हैं आलिंगन रजधानी को...

आज उन्होंने फिर से सत्ता का मंसूबा पाला है
भारत माँ के दिल पर जिनकी गद्दारी का छाला है
षणयंत्रों की खडी श्रंखला कर दी सत्ता पाने को
भूपुत्रों को भड़का कर के भेजा गोली खाने को
मैं सौ - सौ लानत देता हूँ, उस गद्दार कहानी को
जो मरने को छोड़ गए थे झाँसी बाली रानी को

जिसमें जैसा रक्त बहेगा वैसा कर्म करेगा वो
राक्षस कुल में पैदा होकर कैसे धर्म करेगा वो
छद्म उदाहरण दोगे तुम केवल देवी महारानी का
जिनसे था संबंध तुम्हारा केवल रोटी पानी का
अभिमन्यु को युद्धकला का गर्भकाल से ज्ञान मिला
सदा पिता की यश गाथा का बेटों को अभिमान मिला
लेकिन ये भी पूर्ण सत्य है यूँ कहना भी ठीक नहीं
दनुज पित्त की सत्ता से प्रह्लाद माँगता भीख नहीं

हम भी दर्शन को आतुर हैं ऊँचे सभी उसूलों की
आगे आकर निंदा कर दो ,तुम पुरखों की भूलों की
महाराजा के सारे वैभव जब तक ना तज पाओगे
गद्दारी के आरोपों से तब तक ना बच पाओगे
फिर आंखों में सपना पालो, राजतिलक का माथे में
पहले सर्व सम्पदा सौपों,  भारत माँ के खाते में
जिस ऐश्वर्य और धन-दौलत पर अधिकार तुम्हारा है
ये सारा वैभव ही झांसी रानी का हत्यारा है..
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News Digital India 18

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