कुर्सी जाते ही अंदर का मुसलमान जाग गया?


अपने बिदाई भाषण में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के गलत वक्तव्य के बाद सोशल मिडिया में काफी तीखी प्रतिक्रिया आई है.
कोई कह रहा है हामिद अंसारी को किसी मदरसे का मौलवी बनना चाहिए था, इनकी सोंच मस्जिद के इमाम जिअत्नी ही है गलती से देश के उपराष्ट्रपति बन गए. 
तो कोई सोनिया माई की देन बताते हुए कह रहा है कि इनकी ओकात मौलवी जितने भी नहीं है इनको तो जो सिखाया जाता है वही बोलेंगे, मौलवी तो कम से कम अपने दिमाग से तो बोलता है. 
कोई बता रहा है कि सबसे बड़े देशद्रोही तो पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी जैसे मुस्लिम हैं. 10 साल तक कोई परेशानी नही हुयी और अब कुर्सी जाते ही अंदर का मुसलमान जाग गया, देश को तोड़ने की नहीं जोड़ने की बात करें, ज्यादा फ़ायदा होगा.
तो कोई कह रहा है पद से हटते ही अंसारी को इस्लामिक जिहादी सोच के कीड़े ने काटा, जिसका परिणाम गरीब, लाचार, बेबस मुस्लमानों को उठाना पड़ता है, इन पढ़ें लिखे अनपढ गंवारों की वजह से.
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